पानीपत। अखिल भारतीय साहित्य परिषद, हरियाणा प्रांत का 22वां दाे दिवसीय त्रैवार्षिक प्रांतीय अधिवेशन शुक्रवार को एसडी पीजी कॉलेज में शुरू हुआ। अधिवेशन का विषय ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ पर मंथन करते हुए साहित्यकारों ने तीन सत्रों में साहित्य के साथ देश को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। मुख्य अतिथि महिपाल ढांडा ने साहित्य के माध्यम से आजादी के सौ साल बाद भारत को दुनिया का सबसे मजबूत देश बनाने के संकल्प को सिद्धि तक पहुंचाने में सहयोग की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन की श्रेष्ठ कृति हमारी सर्वोत्तम पूंजी है। साहित्य मानव विकास के साथ संस्कार भी पैदा करने वाला होना चाहिए।
अधिवेशन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि सभ्यताओं, गीत-संगीत, लोक गाथाओं को संजोने का काम साहित्य और साहित्यकारों का होता है। दुनिया में क्रांति पैदा करने का सबसे बड़ा हथियार साहित्य ही है। हमारा जीवन दर्शन कैसा हो, दुनिया में शांति और अमन कैसे स्थापित हो, यह सभी काम साहित्यकारों के जिम्मे होते हैं।
उन्होंने कहा कि साहित्यकार बिना कुछ कहे अपनी जिम्मेदारी चुपचाप निभाता है और तभी साहित्य समाज के लिए नए आयाम पैदा करता है। उन्होंने साहित्यकार और लेखक से आग्रह किया कि वे इस अधिवेशन में अपने चिंतन से देश और विदेश सबके लिए कुछ बेहतर विचार पैदा करें। साहित्य विकास के साथ संस्कार देने वाला भी होना चाहिए। ढांडा ने परिषद् को दो लाख रुपये देने की घोषणा की। प्रांत अध्यक्ष सारस्वत मोहन मनीषी ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के अपने कार्यालय में हिंदी अपनाने पर जोर देने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे हिंदी के साथ साहित्य भी मजबूत होगा। प्रथम सत्र में विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त महाधिवक्ता शरद अग्रवाल हरियाणा और डॉ. पूर्णमल गौड़ ने इसका मार्गदर्शन किया। प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. मंजुलता रेडू मुख्य वक्ता रहीं। अध्यक्ष हरीश यादव, समाजसेवी रणबीर आर्य और एसडी एजुकेशन सोसाइटी के सचिव नरेश गोयल प्रथम सत्र का हिस्सा बने। सायंकालीन सत्र में हरीश धनसोइया विशिष्ट मेहमान रहे। गुरुग्राम इकाई की अध्यक्ष विधु कालरा मुख्य वक्ता, प्रांत अध्यक्ष संतोष गर्ग, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पानीपत इकाई के प्रधान प्रदीप शर्मा और रमेश खुराना का इस आयोजन में विशेष योगदान रहा। इससे पहले मुख्य अतिथि ने विभिन्न साहित्यकारों की 11 कृतियों का विमोचन किया। कॉलेज प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया।