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Panipat News: महिलाओं में आज भी कायम है मिट्टी के करवा का क्रेज

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पानीपत। हिंदू धर्म में करवा चौथ का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और पूजा-पाठ करती हैं।
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इस दिन रात्रि में चांद की पूजा करने का भी महत्व है। महिलाएं चांद की पूजा करने के बाद ही व्रत को खोलती हैं। इस साल करवा चौथ का पर्व 20 अक्तूबर रविवार को है। ऐसी मान्यता है कि करवा चौथ के दिन पूजा में मिट्टी के करवे का प्रयोग करना चाहिए। यह बेहद शुभ और पवित्र माना जाता है।

महिलाओं में आज भी मिट्टी के करवा का क्रेज बरकरार है। करवा चौथ के चलते बाजार में मिट्टी के करवों के साथ-साथ कई आकर्षक वैरायटी के करवे भी सजे हुए हैं। वैसे तो बाजार में चांदी व पीतल के करवा भी बिक रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा खरीददारी मिट्टी के करवा की ही हो रही है। शहर के सनौली रोड पर मिट्टी के करवा बेच रहे दुकानदारों ने बताया कि खास ऑर्डर देकर डिजाइन वाले करवा तैयार करवाए गए हैं। सामान्य करवा 20 से 40 रुपये तथा डिजाइन वाला करवा 80 से 100 रुपये में बिक रहा है।
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करवा है पंच तत्वों का प्रतीक

ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे ने बताया कि करवा पंच तत्वों का प्रतीक माना जाता है। मिट्टी के करवा में पांच तत्व जल, मिट्टी, अग्नि, आकाश, वायु होते हैं जिससे व्यक्ति का शरीर भी बना है। करवा में मिट्टी और पानी मिलाया जाता है।
पानी में मिट्टी को गलाकर करवा बनाया जाता है। यह भूमि और जल तत्व का प्रतीक है। उसके बाद इसे धूप और हवा से सुखाकर तैयार किया जाता है। इसके पश्चात आग में पकाया जाता है। हमारी संस्कृति में पानी को परम ब्रह्म माना गया है।
सभी जीवों की उत्पत्ति यहीं से हुई है। इसलिए मिट्टी के करवा से पानी पिलाकर ही पति अपनी पत्नी का व्रत खोलें। यह पंच तत्व और परमात्मा दोनों को साक्षी बनाकर दांपत्य जीवन में सुखी बनाने की कामना करते हैं। साथ ही मिट्टी के बर्तन से पानी पीने से स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है।



पीतल के करवा की कम नहीं मांग

बाजार में पीतल के करवा की मांग भी कम नहीं है। जिसे जो पसंद आए, वहीं खरीद रहा है। बाजार में बाजार में 150 से 300 या इससे भी अधिक कीमत के करवा बिक रहे हैं। साथ ही सुहागिन महिलाएं चलनी की भी खरीदारी कर रही हैं। बाजार में चलनी 20 से 150 रुपये में बिक रही है। रंग-बिरंगी डिजाइन वाली चलनी की मांग ज्यादा है।



करवा का पारंपरिक महत्व बरकरार

करवाचौथ व्रत में सबसे महत्वपूर्ण करवा होता है। पीढि़यां दर पीढि़यां गुजरती जा रही हैं लेकिन महिलाओं के लिए आज भी मिट्टी के बने करवा ही पहली पसंद हैं। बाजार में चांदी और पीतल के करवा की बिक्री के बावजूद मिट्टी के बने करवा को पूजन विधि में शामिल करने की परंपरा बनी हुई है।



क्या कहती हैं सुहागिनें



करवा चौथ का व्रत रखने की तैयारी के सिलसिले में खरीदारी करने बाजार आई हूं। मैंने करवा, पूजन सामग्री और चूड़ियों की खरीदारी की है। व्रत रखने के साथ मैं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करूंगी।

रीटा मलिक, गृहिणी।

उन्होंने करवाचौथ पर व्रत के लिए सब तैयारी पूरी कर ली हैं। पूजा की थाली और मिट्टी के करवा का पारंपरिक महत्व है। वह इस परंपरा को कायम रखेगी। यह बहुत ही प्यारा पर्व है, जो पति-पत्नी के संबंधों में मिठास बढ़ाता है।

उषा दहिया, गृहिणी।

करवा चौथ पर बाजार में चांदी, पीतल व मिट्टी के करवा उपलब्ध हैं लेकिन मिट्टी के करवा का अपना महत्व है। मिट्टी के करवा में पांच तत्व बताए जा रहे हैं जो हमारी संस्कृति का प्रतीक है। सुहागिनों को मिट्टी के करवा का ही प्रयोग करना चाहिए।
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पिंकी देवी, गृहिणी।
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