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Panipat News: करवा चौथ के दिन 80 साल बाद बने पांच अद्भुत संयोग

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पानीपत। करवाचौथ पर इस बार 80 साल बाद कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं। इस दिन समसप्तक योग, बुधादित्य योग के साथ गजकेशरी, महालक्ष्मी और शश योग का दुर्लभ संयोग है। चंद्रमा और गुरु की युति गजकेसरी योग का निर्माण हो रहा है। यह सभी योग पति के भाग्योदय का कारक भी बनेंगे। इस दिन व्रत और पूजा से न सिर्फ पति की लंबी आयु होगी बल्कि उनके किस्मत के बंद दरवाजे भी खुलेंगे।
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अवध धाम मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि पंचांग के अनुसार ज्यो20 अक्तूबर को बुध और शुक्र दोनों ही ग्रह शुक्र की राशि तुला में हैं। जिससे बुधादित्य योग बन रहा है। इसके अलावा शनि अपनी राशि कुंभ में बैठकर शश योग का बना रहे हैं।
करवा चौथ व्रत तिथि, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय

चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 20 अक्तूबर को सुबह 6:46 बजे से।

चतुर्थी तिथि समापन- 21 अक्तूबर को सुबह 4:16 बजे तक।

करवा चौथ व्रत पूजा मुहूर्त- शाम 05:46 से 06:54 बजे।
चांद निकलने का समय- शाम 07:53 बजे।
सरगी खाने का शुभ मुहूर्त- सुबह 04:30 बजे।



व्रत ऐसे रखें और ऐसे करें पूजा
अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे ने बताया कि करवाचौथ का व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए।इसके बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर निर्जला व्रत रखना चाहिए यानी पानी तक नहीं पीना चाहिए। शाम को चांद को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करना चाहिए। करवा चौथ की पूजा शाम को की जाती है। पूजा के लिए सबसे पहले गौरी-शंकर की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद एक चौकी पर करवा रखें और उसमें गेहूं, चावल, मूंग, बताशा और रोली आदि रखें। इसके बाद दीपक जलाएं और गौरी-शंकर की पूजा करें। पूजा के बाद करवा की कथा सुनें या पढ़ें। अंत में चांद को अर्घ्य दें।
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