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Panipat News: महिलाओं और युवतियों को भा रहीं स्टोन, पर्ल, कुंदन और सिल्वर राखियां

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राखियों से चमकती दुकान। संवाद
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- बाजार में बढ़ा नया ट्रेंड, खरीदारी के लिए बढ़ती जा रही भीड़
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संवाद न्यूज एजेंसी

पानीपत। रक्षाबंधन के नजदीक आते ही बाजार में रौनक बढ़ रही है। हर तरफ रंग-बिरंगी राखियों की चमक बिखर रही है। नई-नई वैरायटी की राखियां आई हैं। बहनों में राखियां खरीदने के लिए उत्साह नजर आ रहा है। इस पावन पर्व के आने से पहले ही बाजार भाई-बहन के रिश्ते की मिठास से महकने लगा है। इस बार बाजार में परंपरागत राखियों के साथ-साथ ट्रेंडिंग डिजाइनों की भरमार है।
युवतियां और महिलाएं स्टोन, पर्ल, कुंदन और सिल्वर राखियों को ज्यादा खरीद रही हैं। हैंडमेड, इको-फ्रेंडली और मैसेज वाली राखियों की मांग भी बढ़ी है। महिलाओं और लड़कियों में इस बार राखियों को लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।
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इंसार बाजार में राखी के दुकानदार राजेश कुमार ने बताया कि इस बार ग्राहकों की संख्या अच्छी है। राखियों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। लोग क्वालिटी और डिजाइन पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। राखी केवल एक साधारण धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इसे बनाने में कई प्रकार के धागों और सजावटी सामग्री का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले रेशम, मौली, जरी, कॉटन या ऊन जैसे धागों का चयन किया जाता है। इन धागों को खूबसूरती से गूंथकर या ब्रेसलेट की तरह आकार देकर तैयार किया जाता है। इसके बाद राखी को सजाने के लिए उसमें मोती, पत्थर, कुंदन, छोटे-छोटे फूल, पंख, और धार्मिक प्रतीक जैसे ओम, गणेश या कृष्ण जोड़े जाते हैं।
बच्चों की राखियों में लगाई जाती है लाइट
बच्चों की राखियों में कार्टून कैरेक्टर या एलईडी लाइट भी लगाई जाती हैं। राखी को पहनने में आरामदायक बनाने के लिए इसके पीछे एक सॉफ्ट बेस या कार्ड लगाया जाता है। आकर्षक ढंग से पैक किया जाता है ताकि यह उपहार के रूप में भी सुंदर लगे। आजकल बाजार में इको-फ्रेंडली, बीज वाली, फोटो और नाम लिखी राखियां बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। इस प्रकार, एक राखी कई रंगों, भावनाओं और कलात्मकता से मिलकर तैयार होती है, जो भाई-बहन के रिश्ते को और भी खास बना देती है। राखी की कीमत में बाजार में 10 रुपये से शुरू हो जाती है।
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मजबूत रहेगा भाई-बहन का रिश्ता : आस्था

राखी खरीद रही सेक्टर छह की आस्था बंसल ने बताया कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं बल्कि भावनाओं को जोड़ने वाला अवसर है। एक धागे में लिपटा यह पर्व सुरक्षा, स्नेह और विश्वास का प्रतीक बनकर हर साल नई यादें छोड़ जाता है। इस बार भी बाजार में उमड़ी भीड़ और लोगों का उत्साह यह दिखाता है कि चाहे समय कितना भी बदल जाए भाई-बहन का यह बंधन हमेशा मजबूत रहेगा।
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