सिविल अस्पताल में शनिवार रात को एक छह माह की गर्भवती महिला की मौत हो गई। परिजनों ने महिला की मौत के बाद हंगामा भी किया और डॉक्टरों पर समय पर इलाज ना करने के आरोप भी लगाए। हालांकि अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि प्रसूता उनके पास मृत हालत में आई थी। वहीं परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से मना कर दिया और शव को घर ले गए। डॉक्टरों ने मामले में पुलिस कार्रवाई कराई है। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि प्रसूता की मौत कुछ गलत खाने से हुई है। मृतका 30 जुलाई से सिविल अस्पताल में दाखिल थी।
जानकारी के अनुुसार 42 वर्षीय मुन्नी पत्नी मेहरदीन निवासी अशोक विहार कॉलोनी अब छह माह की गर्भवती थी। उसमें खून की मात्रा महज 6 ग्राम थी। तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उसे इलाज के लिए 30 जुलाई को सिविल अस्पताल में दाखिल कराया था। डॉक्टरों ने 31 जुलाई व एक अगस्त को उसको खून भी चढ़ाया था। डॉक्टरों का कहना है कि तीन अगस्त को खून चढ़ने के बाद प्रसूता को उसके परिजनों अपने घर ले गए थे। रात को साढ़े 12 बजे प्रसूता को मृत अवस्था में सिविल अस्पताल में लाया गया। जहां डॉक्टरों ने कागजी कार्रवाई कर शव को परिजनों को दे दिया। वहीं परिजनों का आरोप है कि जब वो महिला को लेकर आए तो महिला जीवित थी। कई बार डॉक्टरों को फोन किया गया, लेकिन रात को डॉक्टर नहीं आए। इसलिए प्रसूता की मौत हो गई। मेहरदीन पेशे से मजदूर है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आरोप बेबुनियाद है:
महिला चार दिन से सिविल अस्पताल में दाखिल थी। उसको तीन बार खून भी चढ़ाया गया था। परिजन अपनी मर्जी से उसको अस्पताल से ले गए थे। रात को मृत अवस्था में उसको अस्पताल में लाया गया था। उन्होंने मामले में पुलिस कार्रवाई भी कराई है। उनको शक है महिला की कुछ गलत खाने से मौत हुई है। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया था।
डॉ. सुखदीप कौर, महिला रोग विशेषज्ञ सिविल अस्पताल पानीपत।
सिविल अस्पताल में लापरवाही का पहला मामला नहीं
सिविल अस्पताल में गर्भवती महिला या फिर जच्ची की मौत का यह पहला मामला नहीं है। सिविल अस्पताल में तीन दिन पहले कच्चा कैंप निवासी एक गर्भवती महिला की मौत हो गई थी।
एक साल में 19 प्रसूताओं की मौत
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार डिलीवरी के दौरान एक साल में 19 महिलाओं की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के बाद भी जच्चा बच्चा की मौत के मामलों को नहीं रोका जा पा रहा है। आज भी जिले भर में 50 से अधिक दाईयां सक्रिय है। एक साल में 25 से अधिक शिशुओं की भी डिलीवरी के दौरान मौत हुई है।
वर्जन
महिला की रात को घर ले जाने के बाद मौत हुई थी। उनके पास मृत अवस्था में महिला को लाया गया था। उन्होंने मामले की जांच करवा ली है।
डॉ. आलोक जैन, एमएस सिविल अस्पताल