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Panipat News: शीतकालीन गृह कार्य से बढ़ेगा बच्चों का ज्ञान और कौशल

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पानीपत। शिक्षा निदेशालय ने शीतकालीन अवकाश के दौरान बालवाटिका से पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए निपुण हरियाणा मिशन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नवाचार आधारित शीतकालीन गृहकार्य जारी किया है। इसका उद्देश्य बच्चों के ज्ञान, कौशल और सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है। निदेशालय द्वारा सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों और खंड शिक्षा अधिकारियों को जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यह गृहकार्य परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर किया जाएगा, जिसमें माता-पिता, दादा-दादी और अन्य वरिष्ठ सदस्य सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
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शीतकालीन गृहकार्य में विद्यार्थियों को हिंदी और गणित विषयों से जुड़ी विभिन्न गतिविधियां दी जाएंगी, जो बच्चों की सोचने, समझने और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाएंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में लेखन, पठन, गणना और जीवन कौशल का विकास किया जाएगा। गृहकार्य को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह अनुभव आधारित शिक्षण को बढ़ावा दे और परंपरागत रटने की पद्धति से हटकर बच्चों को रचनात्मक और सृजनात्मक सोच की ओर प्रेरित करे। चर्चा, कहानी सुनाना, प्रस्तुतीकरण और विचार-विमर्श जैसी गतिविधियां बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास में सहायक होंगी।

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व्हाट्सएप के जरिए मिलेगी दैनिक गतिविधि
शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अभिभावक-शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से प्रतिदिन गृहकार्य की जानकारी साझा करें। अभिभावकों को बच्चों द्वारा किए गए कार्य की फोटो या वीडियो प्रतिदिन साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि बच्चों की प्रगति का नियमित मूल्यांकन किया जा सके। शिक्षकों को बच्चों के कार्य पर सकारात्मक टिप्पणी और इमोजी के माध्यम से प्रशंसा करने के भी निर्देश दिए गए हैं, जिससे बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह बना रहे।
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शीतकालीन गृहकार्य की प्रमुख गतिविधियां
अवधि: 1 से 15 जनवरी तक।
कक्षाएं: बालवाटिका से कक्षा पांचवीं तक।
विषय: हिंदी व गणित।
समय: प्रतिदिन लगभग 2 घंटे।
विशेषता: अनुभव आधारित व गतिविधि केंद्रित शिक्षण।

वर्जन -
बच्चों के गृहकार्य में शीतकालीन मौसम व बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर गतिविधियां तैयार की गई हैं। गृहकार्य में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं होगा। अवकाश के बाद शिक्षक कक्षा में गृहकार्य की समीक्षा और मूल्यांकन करेंगे।
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सुभाष चंद्र भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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