समालखा (पानीपत)। अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के तीन दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन में कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान जनजाति समाज के अस्तित्व को बचाने के संकल्प के साथ ही लव जिहाद के खिलाफ महाभारत छेड़ने का निर्णय लिया गया। इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जनजाति बंधुओं के बीच कार्य करने का आह्वान किया।
पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना केंद्र में चल रहे तीन दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने सम्मेलन में आए सभी प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्र में जाकर जनजाति बंधुओं के बीच में व्यापक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया। वनवासी कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने रविवार के प्रथम सत्र में कहा कि जनजाति समाज विशाल सनातनी समाज का आधार स्तंभ है। सबका जड़-नाल वनों में ही हुआ है। प्राचीन वेदों की रचना में वनवासी समाज का भी अहम योगदान रहा है। सभी जनजाति समाज के पर्व-त्योहार व पूजा पद्धति सनातनी परंपरा से मिलते हैं। जिसका भाव एक ही है।
उन्होंने कहा कि अलग करने का षड्यंत्र अंग्रेजों की देन है। जिन्होंने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पुस्तकों के माध्यम से रचा। जनजाति समाज संग्रही प्रवृत्ति का नहीं होता। वह प्रकृति से उतना ही लेता है, जितना उसे जरूरत है। ऐसे जनजाति समाज के अस्तित्व को बचाना हम सभी का कर्तव्य बनता है। वर्तमान में समाज में फैसला विमर्श भ्रम फैला रहा है। उस भ्रामक विमर्शों से समाज को बचाने के लिए हमारे विमर्श स्थापित होने चाहिए। नगरवासी-वनवासी सब भारतवासी ध्येय पर वनवासी कल्याण केंद्र कार्य कर रहा है।
नागालैंड के डॉ. थुंबई जेलियांग ने नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों में धर्मांतरण विषय पर कहा की मतांतरित लोग वहां के स्थानीय लोगों को ही बाहरी साबित करने पर लगे हुए हैं। वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा संचालित विद्यालयों के साथ देश के अन्य स्थानों में स्थानीय बच्चों को पढ़ने की सुविधा से धर्मांतरित लोग विचलित हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के प्रांत संगठन मंत्री रामनाथ ने बस्तर के माओवाद समस्या पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि जिस जनजाति का अस्तित्व जंगल होता है, उस जंगल में माओवादियों द्वारा लैंड माइंस बिछाए गए हैं। जहां वे स्वतंत्र रूप से जा नहीं सकते। वहां के लोगों को सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। इसका कारण सबके पास आधारकार्ड का न होना भी है। आधार बनाने के लिए शहर जाते हैं तो मुखबिर बताकर माओवादी परेशान करते हैं। जिससे मौलिक अधिकारों का हनन होता है। सरकारी विद्यालयों और आंगनबाड़ी के पक्के मकानों को तोड़ दिया जाता है। शिक्षा से वंचित रखकर माओवादी अशिक्षा के आड़ में ग्रामीणों को अपने पक्ष में कर लेते हैं। ऐसे जनजाति क्षेत्रों में शिक्षा व स्वास्थ्य संगठन के कार्य व्यापक रूप में करने की आवश्यकता है। जशपुर के पद्मश्री जगेश्वर भगत विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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झारखंड में तेजी से बढ़ रहा लव जिहाद
डॉ. राजकिशोर हांसदा ने भारत में लव जिहाद पर प्रकाश डाला और कहा कि यह समस्या झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में गंभीर है। वहां घुसपैठ कर आए बांग्लादेशी मुसलमान संथाली जनजाति लड़कियों को झांसे में लेकर विवाह करते हैं और जनसंख्या बढ़ाने के साथ जमीन भी हड़प लेते हैं। इसके खिलाफ हम सबको महाभारत छेड़कर अपनी बहन-बेटी, जंगल-जमीन के साथ धर्म की भी रक्षा करनी होगी।