पानीपत। वार्ड नंबर-12 के अंतर्गत आने वाली विद्यानंद कॉलोनी शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी होने के साथ अपने हालात के चलते सबसे ज्यादा खस्ताहाल कॉलोनी भी बन चुकी है। यहां सबसे ज्यादा आबादी होने के बावजूद गंदगी भी सबसे ज्यादा है, लेकिन समस्याओं का हल निकालने वाला कोई नहीं है। हालात इतने बुरे हैं कि लोगों का जीवन नरक से भी बदतर हो चुका है। जल निकासी व्यवस्था बिलकुल ठप होने से अभी से लोगों के घरों में गंदा पानी घुस रहा है। इसे रोकने के लिए लोगों को मिट्टी और ईंटों की मेढ़ बनानी पड़ती हैं। अब लोगों को बरसात का डर सता रहा है। लोगों का कहना है कि बरसात में तो यहां गंदगी की बाढ़ आ जाती है।
कॉलोनी की आबादी करीब 40 हजार है। ऐसे में सांसद, विधायक, मेयर या पार्षद, सभी के लिए यह खास है, लेकिन चुनाव के तुरंत बाद यहां के लोगों की कोई फरियाद तक नहीं सुनता। ग्रामीण विधानसभा में गंदगी, कीचड़, ओवरफ्लो नाले, ठप निकासी व्यवस्था में सबसे पहला नाम इसी कॉलोनी का आता है। उपेक्षा से नाराज लोगों का कहना है कि नेताओं और निगम अधिकारियों की लापरवाही की वजह से उन्हें नरक भोगना पड़ रहा है। अबकी बार कॉलोनी के लोग नेताओं को चोट अपनी वोट से देंगे।
मूलभूत सुविधाओं को तरसते लोग
सनौली रोड से लेकर उग्रा खेड़ी गांव तक बनी फैली इस कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं तक नहीं है। अमरूत योजना के तहत गलत तरीके से सीवर लाइन बिछाई हैं, जो अभी से ब्लॉक हैं। नालों से गंदा पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों के बीच में भरा रहता है। चारों तरफ गंदगी के ढ़ेर लगे हैं। तकरीबन हर गली उखड़ी पड़ी है और हर गली में गंदा पानी जमा है। हर घर के सामने से जाने वाला नाला ओवरफ्लो है। इसे लेकर अमर उजाला टीम ने विद्यानंद कॉलोनी का दौरा किया और यहां के हालात जानें।
वोट से देंगे चोट
वोट लेने के लिए यहां सब आ जाते हैं, लेकिन लोगों की परेशानी देखने के लिए कोई नेता नहीं आता। सुधार तो दूरी की बात मौजूदा हालात से भी नेता परहेज कर रहे हैं। अबकी बार लोगों में इतना गुस्सा है कि इन नेताओं को वे अपनी वोट से चोट देंगे। -दीपक गुप्ता
जी रहे नारकीय जीवन
जिंदगी नारकीय हो गई है। गलियों में गंदा पानी भरा रहता है। लोगों के घरों में अभी से गंदा पानी घुस रहा है। बरसात में तो गंदगी की बाढ़ आ जाएगी। बार बार निगम व नेताओं को शिकायत करने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। -मोहम्मद असलम अहमद
बेहद खस्ता हालात
यहां के हालात बेहद खस्ता हैं। जल निकासी ठप है। लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो रहा है। घरों के सामने मिट्टी और ईंट इसलिए लगानी पड़ती है कभी गंदा पानी घर के अंदर तक न घुस जाए। खुद पर बीते तो समझ आता है। -मोनू शर्मा
खुद करनी पड़ती है सफाई
यहां पर गंदगी सबसे ज्यादा है। निकासी ठप है। सफाई कर्मचारी सफाई करने आते ही नहीं। ऐसे गंदे हालात हो जाते हैं कि घर से बाहर तक नहीं निकला जाता। इसलिए मजबूरी में लोगों को खुद ही नालों की सफाई करनी पड़ती है। -रोहित पांचाल
हालात बयां कर रहे कहानी
यहां के हालात इतने बदतर है कि इनके लिए लोगों के पास शब्द नहीं है। चारों तरफ गंदगी का माहौल है। हर नाला टूटा पड़ा है। नालियों की कभी सफाई न होने से सिल्ट जम चुकी है। ओवरफ्लो होने से गंदा पानी गलियों में जमा रहता है। -संजय
कोई सुनवाई नहीं होती
यहां के लोग अगर किसी नेता, पार्षद या निगम के पास शिकायत करने भी चले जाते हैं तो सुनवाई नहीं होती। अगर नेेता एक बार आकर मौके का हाल देखेंगे तब उन्हें पता चलेगा कि वे कैसा जीवन जी रहे हैं। हर गली टूटी और गंदे पानी से भरी है। -सेठपाल
गंदगी से लोग हो रहे बीमार
गंदगी से बीमारियों को हमेशा ही डर है। गंदगी में मच्छर पनप रहे हैँ। संक्रमण का भी खतरा बना रहता है। चारों तरफ गंदगी होने की वजह से बदबूदार माहौल बन चुका है। इस ओर सरकार और निगम को जल्द से जल्द ध्यान देने की आवश्यकता है। -सचिन गुप्ता
सबसे बदतर हालात
पहले ग्राम पंचायत के अधीन एरिया था तो हालात बेहतर थे। अब तो सबसे ज्यादा बदतर हालात यही के हैं। पूरी कॉलोनी का यही हाल है। गली टूटी पड़ी हैं और गंदा पानी भरा हुुआ है। नाम की सीवरेज लाइन बिछाई है जो कभी चल ही नहीं पाई। -राजबीर मिस्त्री
घर से निकलना मुश्किल
घर के बाहर से दो फीट से भी चौड़ा नाला गुजरता है। ये कभी भी ओवरफ्लो हो जाता है। सारा गंदा पानी घर में घुस जाता है। घर से बाहर अगर पहला कदम रखते हैं तो वो भी गंदे पानी में रखा जाता है। बच्चों का घर से निकलना तक मुश्किल है। -रामकन्या
सालों से समस्या बरकरार
यहां पर निकासी न होने की समस्या आज से नहीं बल्कि सालों से बरकरार है। इसके लिए सरकार बजट भी देती है टेंडर भी लगते हैं लेकिन कमीशन के चक्कर में लोगों को नरक भोगना पड़ रहा है। लोगों में इससे भयंकर रोष बना हुआ है। -मंजीत मलिक
अमरूत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने का काम चल रहा है। एक टुकड़ा लाइन बिछानी बाकी है। इस वजह से काम रुका हुआ है। एक अनुमान है कि एक सप्ताह के अंदर नाले का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। इसके बाद निकासी की व्यवस्था सही होगी और परेशानी नहीं आएगी। - सतीश सैनी, पार्षद, वार्ड नंबर 12