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Panipat News: पानी निकासी और कूड़ा उठाना बड़ी चुनौती, जोहड़ ओवरफ्लो

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महेंद्र सिंह - फोटो : स्रोत : विभाग
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कुलदीप राठी
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समालखा। ऐतिहासिक पट्टीकल्याणा गांव बुनियादी समस्याओं से बुरी तरह जूझ रहा है। यहां पानी निकासी और कूड़ा उठान बड़ी चुनौती है वहीं जोहड़ ओवरफ्लो होने से परेशानी बढ़ जाती है। बारिश के इस मौसम ने गांव की इन बुनियादी खामियों को पूरी तरह उजागर कर दिया है। इससे ग्रामीणों का जीना मुहाल हो चुका है।
पट्टीकल्याणा गांव में चार बड़े जोहड़ (तालाब) हैं। सामान्य दिनों में तो जैसे-तैसे काम चल जाता है, लेकिन बारिश में ये चारों जोहड़ों का ओवरफ्लो (उफान पर) हो चुके हैं। पूरे गांव की नालियों और गलियों का गंदा पानी बहकर इन्हीं जोहड़ों में जाता है। निकासी के कोई अन्य पुख्ता प्रबंध न होने के कारण जोहड़ों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
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वर्तमान में इन तालाबों की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि इनका पानी अब पशुओं के पीने योग्य भी नहीं बचा है। जोहड़ गंदगी, रासायनिक मलबे और दलदल से भर चुके हैं, जिससे आसपास के रिहायशी इलाकों में भयंकर बदबू फैल रही है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है।
जलभराव के साथ-साथ गांव में सफाई व्यवस्था का भी पूरी तरह से दिवाला निकल चुका है। गांव के चारों तरफ और मुख्य रास्तों पर गंदगी व कूड़े-कचरे के बड़े-बड़े ढेर दिखाई दे रहे हैं। गांव में नियमित रूप से कूड़ा उठाने की कोई ठोस नीति नहीं है। हालत यह है कि दो से तीन महीने में एक बार ही गांव से भारी मात्रा में कूड़ा उठाया जाता है, जिससे बाकी दिनों में कचरे के पहाड़ खड़े हो जाते हैं। संवाद

फसल खराब होने का डर
पट्टीकल्याणा गांव के ठीक पश्चिमी हिस्से में दिल्ली-अमृतसर राष्ट्रीय राजमार्ग (जीटी रोड) गुजरता है। जीटी रोड की तरफ ऊंचाई होने और पानी की आगे कोई सही ड्रेनेज व्यवस्था न होने के कारण, बरसात और नालियों का गंदा पानी वापस बैक मारता है। यह दूषित पानी अब गांव के साथ लगते किसानों के खेतों की तरफ रुख कर रहा है। ऐसे में फसल खराब होने का डर सता रहा है।

गांव में डंपिंग ग्राउंड के लिए जगह तय की जाए। इसके साथ निस्तारण की भी व्यवस्था की जाए। पानी की निकासी के भी प्रबंध व्यापक बनाए जाने की जरूरत है। -ईश्वर
गांव के चारों तालाब गंदगी से पटे हैं। बारिश में इनका गंदा पानी गलियों में आ जाता है। बदबू से घरों में बैठना मुश्किल है और मवेशी भी इसके कारण बीमार हो रहे हैं। -कवर पाल

हमारे खेत जीटी रोड और गांव के निचले तरफ हैं। निकासी न होने से गांव का पूरा गंदा पानी हमारी फसल में घुस रहा है। इसे नहीं रोका तो फसल खराब हो जाएगी। -बल्लू राम महीनों तक गांव से कूड़ा नहीं उठाया जाता। सफाई व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति होती है। हमें नारकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। सरकार ध्यान दे। -संदीप

बच्चे और बुजुर्ग गंदगी के कारण सबसे ज्यादा परेशान हैं। मच्छरों की भरमार है। मुख्य रास्तों पर कूड़े के ढेर हमारी शान को दागदार कर रहे हैं। डंपिंग स्टेशन का समाधान युद्ध स्तर पर होना चाहिए। -कंवर सिंह
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सफाई कर्मचारियों की संख्या गांव की आबादी के हिसाब से बहुत कम है। नालियां तो साफ हो जाती हैं, लेकिन कचरा उठाने वाली गाड़ियों के न आने से कूड़ा सड़कों पर ही सड़ता रहता है। -महेंद्र सिंह

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

महेंद्र सिंह- फोटो : स्रोत : विभाग

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