माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। प्राचीन देवी मंदिर में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन बुधवार को आचार्य लालमणि पांडेय ने सती प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी को साथ मिलकर कथा सुननी चाहिए और एक-दूसरे के विचारों का सदैव सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जहां पति का सम्मान न हो, वहां पत्नी का जाना उचित नहीं है।
आचार्य लालमणि पांडेय ने सती प्रसंग सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव अपनी पत्नी सती के साथ अगस्त्य ऋषि के आश्रम में रामकथा सुनने गए थे। वहां ऋषि ने भगवान शिव का सम्मान किया और उन्हें रामकथा सुनाई। इसके बाद जब भगवान शिव और सती दंडकारण्य से लौट रहे थे, तब भगवान शिव ने दूर से ही प्रभु श्रीराम को प्रणाम किया।
सती को संदेह हुआ कि कोई साधारण मनुष्य भगवान कैसे हो सकता है। भगवान शिव के मना करने के बावजूद सती ने सीता का रूप धारण कर श्रीराम की परीक्षा लेने का प्रयास किया। प्रभु श्रीराम ने उन्हें पहचान लिया। आचार्य ने बताया कि सती के इस आचरण और बाद में असत्य बोलने के कारण भगवान शिव ने उनका मानसिक रूप से त्याग कर दिया और समाधि में लीन हो गए।
आचार्य ने बताया कि बाद में राजा दक्ष ने भगवान शिव के विरोध में यज्ञ का आयोजन किया। सती को यज्ञ में आमंत्रित नहीं किया गया था, इसके बावजूद वह भगवान शिव की असहमति के बावजूद अपने पिता के घर पहुंच गईं। वहां यज्ञ में भगवान शिव के लिए कोई स्थान नहीं देखकर और उनका अपमान होते देख सती अत्यंत दुखी हुईं। उन्होंने योगाग्नि में अपने प्राणों की आहुति दे दी।
आचार्य ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि पारिवारिक जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे के विचारों और भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार में पत्नी, पुत्र, परिवार और पड़ोसी को समझाना सबसे कठिन होता है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की आरती की और आशीर्वाद प्राप्त किया। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।