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Panipat News: राजाखेड़ी गांव की वीनिता वर्मा आज लेंगी जैन दीक्षा, आजादी के बाद दीक्षा लेने वाली गांव की पहली बेटी

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पानीपत। राजाखेड़ी गांव की वीनिता वर्मा 18 वर्ष की आयु में रविवार को जैन दीक्षा ग्रहण करेंगी। एसएस जैन सभा की ओर से गांव में दीक्षा कार्यक्रम किया जाएगा। वीनिता वर्मा आजादी के बाद जैन दीक्षा लेने वाली गांव की पहली बेटी होंगी। वे तीन साल से ज्ञान प्राप्त कर रही थी। आजादी से पहले संतोष ने वैराग्य प्राप्त किया था। गांव से श्रेयांश मुनि बन चुके हैं। उन्होंने इसी साल चातुर्मास के दौरान गांव में प्रवेश किया था।
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वीनिता वर्मा की जैन दीक्षा के लिए गांव में उत्साह का माहौल बना हुआ है। ग्रामीण बेटी को तिलक व बान देने के लिए अपने घर ला रहे हैं। ढोल और डीजे की धुन पर महिला व बच्चे नाचते कूदते पहुंच रहे हैं। वीनिता वर्मा ने बताया कि उनके पिता सुरेश वर्मा और मां सीमा वर्मा व एक भाई वीनित हैं। उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से 12वीं कक्षा पास की इसके बाद कॉलेज में स्नातक की। गांव में जैन मुनि का प्रवास रहता था। वह प्रवचन सुनने जाती थी, इनमें उनका मन लग गया। उन्होंने तीन साल पहले जैन शिक्षा को अपना लिया था। अब पूरी तरह से वैराग्य में आने का फैसला लिया। पिता सुरेश वर्मा और मां सीमा वर्मा ने बताया कि बेटी ने अपनी इच्छा से जैन दीक्षा प्राप्त करने का फैसला लिया है। वे उनके साथ हैं।





जैन दीक्षा में शिक्षा मंत्री होंगे मुख्यातिथि
एसएस जैन सभा राजाखेड़ी द्वारा रविवार को गांव में जैन भगवती दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा, इसमें शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा मुख्यातिथि होंगे। सभा के प्रधान सुरेश जैन और राजीव जैन ने बताया कि दीक्षा महोत्सव के लिए गांव में लगातार कार्यक्रम किए जा रहे हैं। लोग वीनिता को अपने घर बुलाकर तिलक कर रहे हैं। इस मौके पर विनोद जैन, विजेंद्र जैन, सुनील जैन व संजय जैन मौजूद रहे।
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आत्मा को कर्मों से मुक्त कर मोक्ष प्राप्त करना
राजीव जैन ने बताया कि जैन धर्म प्राचीन भारतीय धर्म है। यह अहिंसा, सत्य और आत्मसंयम पर आधारित है। इसका लक्ष्य आत्मा को कर्मों से मुक्त कर मोक्ष प्राप्त करना, इसमें अहिंसा का सर्वोच्च महत्व, कर्म सिद्धांत, तीर्थंकरों द्वारा बताए गए तप का मार्ग, तीन रत्न - सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, समरक दृष्टि हैं। अंतिम लक्ष्य होता है कि जन्म-मरण से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करना। जैन दीक्षा इसलिए ली जाती है ताकि संसार के मोह-माया से मुक्त होकर मोक्षगामी बन सकें। जैन दर्शन के अनुसार तप, त्याग और संयम से कर्मों का नाश कर आत्मा को मुक्त किया जा सकता है।
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