माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। जिस उम्र में अक्सर लोग चलने-फिरने में भी असमर्थ हो जाते हैं और लाठी का सहारा लेते हैं, उस उम्र में पानीपत के सेक्टर-17 की रहने वाली 83 वर्षीय दर्शना देवी भाला फेंककर इतिहास रच रही हैं। जिला एथलेटिक्स एसोसिएशन द्वारा शुक्रवार को आर्य पीजी कॉलेज में आयोजित पांचवें राष्ट्रीय जैवलिन दिवस पर 83 वर्षीय दर्शना देवी ने 14.04 मीटर की दूरी तक भाला फेंककर तीसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया।
रिटायरमेंट के बाद खेलों में कदम, मलेशिया तक फहराया परचम
मूल रूप से बिचपड़ी गांव की दर्शना देवी एक रिटायर्ड अध्यापिका हैं। वर्ष 2017 में 74 वर्ष की उम्र में उन्होंने खेलों के मैदान में कदम रखा और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2017 में स्टेट लेवल पर तीन मेडल जीतने के बाद उन्होंने दिल्ली में नेशनल गोल्ड जीता। इसके बाद मलेशिया के पिनांग शहर में आयोजित एशिया पेसिफिक मास्टर गेम्स में पांच मेडल जीतकर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। अब तक वे नेशनल, इंटरनेशनल और स्टेट लेवल पर कुल 28 मेडल जीत चुकी हैं।
90 वर्षीय मान कौर से मिली प्रेरणा
दर्शना देवी ने बताया कि उन्हें देश की सबसे बुजुर्ग एथलीट दिवंगत मान कौर से खेलने की प्रेरणा मिली। जब उन्होंने मान कौर को 90 वर्ष की आयु में खेलते देखा, तो उन्होंने सोचा कि जब वे इस उम्र में दौड़ सकती हैं तो वह भी ऐसा कर सकती हैं। उन्होंने पानीपत में आयोजित 10 किलोमीटर पिंक मैराथन में भी पहला स्थान प्राप्त किया था।
सरकार से सहयोग न मिलने पर जताई नाराजगी
देश-विदेश में तिरंगा लहराने के बावजूद दर्शना देवी को सरकार से कोई वित्तीय सहायता या प्रोत्साहन नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि वे अपनी पेंशन से बचत कर अब तक लगभग 2.50 लाख रुपये खेल यात्राओं और प्रतियोगिताओं पर खर्च कर चुकी हैं। उनका मानना है कि यदि सरकार बुजुर्ग खिलाड़ियों का सहयोग करे, तो हरियाणा के अनेक वरिष्ठ नागरिक देश के लिए मेडल ला सकते हैं।