बिजली बिलों में सर्कल चार्ज व फ्यूल चार्ज जमा कराने के बाद भी उपभोक्ताओं को नया खंभा लगवाने या ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए ट्रांसपोर्ट खर्च के नाम पर जेब ढीली करनी पड़ रही है। ट्रांसफार्मर बदलवाने के लिए उपभोक्ता को करीब तीन से चार हजार रुपये ट्रांसपोर्ट खर्च के नाम पर चपत लग रही है।
निगम अधिकारी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। निगम के पास ट्रांसपोर्ट की सुविधा होते हुए भी लोगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा है। यदि किसी उपभोक्ता का ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है। पहले तो उसे शिकायत के लिए निगम कार्यालय में इस टेबल से उस टेबल तक अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जब नए ट्रांसफार्मर की मंजूरी मिलती है तो उसे अपनी ही जेब से ट्रांसपोर्ट खर्च वहन कर ट्रांसफार्मर साइट तक पहुंचाना पड़ता है।
जिससे एक ट्रांसफार्मर बदलवाने में ही उसे हजार रुपये की चपत लग जाती है। जबकि बिजली निगम मासिक बिलों में ही सर्कल चार्ज व फ्यूल चार्ज जुड़ा होता है, लेकिन पैसे देने के बाद भी उपभोक्ताओं को सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा। ट्रांसपोर्ट की सुविधा के लिए निगम द्वारा हर डिवीजन व सबडिवीजन पर गाड़ियों की व्यवस्था की गई है लेकिन उपभोक्ताओं को उसका कोई लाभ नहीं मिल रहा।
ट्रांसफार्मर बदने की योजना किया बदलाव
निगम ने अब ट्रांसफार्मर बदलने की पॉलिसी में बदलाव किया है। ट्रांसफार्मर में खराबी आने पर उसे बदलवाने के लिए उपभोक्ता को पहले खराब ट्रांसफार्मर स्टोर में जमा कराना पड़ता है। उसके बाद ही टेस्टिंग के बाद ही उसे नया ट्रांसफार्मर जारी किया जाता है। निगम की इस योजना के तहत उपभोक्ता पर अब ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी दोहरा पड़ने लगा है।
निगम के पास हर डिविजन पर गाड़ी मौजूद
ट्रांसपोर्ट की सुविधा के लिए निगम के पास हर डिविजन में दो गाड़ियां तथा सब डिवीजन स्तर पर एक गाड़ी मौजूद है। पूरे सर्कल आफिस में निगम के पास करीब 15 गाड़िया मौजूद हैं, बावजूद इस खंभे व ट्रांसफार्मर साइट तक पहुंचाने के लिए उपभोक्ता को अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है।