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Panipat News: व्यापारियों ने निगम पर फोड़ा मालिकाना हक न मिलने का ठीकरा

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पानीपत। शहरी स्वामित्व योजना के तहत दुकानदारों को मालिकाना हक न मिल पाने का मामला लगातार बढ़ रहा है। शहर के व्यापारियों ने इसका ठीकरा नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के सिर पर फोड़ दिया है। वे इसके विरोध में खुलकर सामने आ गए हैं। संयुक्त व्यापार मंडल समिति के बैनर तले शनिवार को व्यापारियों व दुकानदारों ने सनौली रोड पर स्थित एक रेस्टोरेंट में बैठक की। जिसमें समिति के अंतर्गत 12 बाजारों के प्रधान शामिल हुए। बैठक में शहरी स्वामित्व योजना पर चर्चा की गई। उन्होंने साफ कहा कि निगम अधिकारियों की लापरवाही के चलते व्यापारियों को पात्रता के बाद भी मालिकाना हक नहीं मिला है। 400 में से मात्र 18 व्यापारियों को ही इसका लाभ दिया गया है।
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प्रधान कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने 2018 में 20 वर्ष पुराने किरायेदारों को मालिकाना हक देने की घोषणा की थी। इसके अंतर्गत 31 दिसंबर 2020 तय तारीख मानी थी। इस तारीख तक 20 साल पूरे होने वाले दुकानदारों को दुकानों का मालिकाना हक देना था। वे सर्कल रेट पर दुकानों की रजिस्ट्री करा सकते थे। उन्होंने कहा कि शहर में करीब 400 दुकान किराये पर दी गई हैं। इनमें से मात्र 18 को ही योजना का लाभ दिया गया है। वे अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त डॉ. वीरेंद्र कुमार से सोमवार को मिलेंगे। उनके सामने पोर्टल दोबारा खोलने की मांग करेंगे। इस मौके पर सुरेश बवेजा, राजेश सूरी, इंद्रजीत कथूरिया, विशाल वर्मा, अशोक सलूजा व कीमतीलाल कपूर मौजूद रहे। वहीं उप निगम आयुक्त अरुण भार्गव ने बताया कि शहरी स्वामित्व योजना में पात्रों को मालिकाना हक देने के लिए पोर्टल पर आवेदन करना था। इसमें सभी कागज व जानकारी पूरी मिलने पर संबंधित लोगों को पत्र जारी किए गए हैं। बाकी के आवेदन रद्द कर दिए गए हैं। अधिकारियों पर अनदेखी के लगाए आरोप निराधार हैं।

68 ने आवेदन किया और 37 के खारिज
नगर निगम की माने तो 68 दुकानदारों ने स्वामित्व योजना के लिए आवेदन किया था। इनमें से 37 के आवेदन खारिज कर दिए गए। 31 के आवेदन मंजूर किए गए। इनमें से 18 पैसे जमा करा पाए। इनमें से 11 को शुक्रवार को आर्य पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मालिकाना हक दिया गया। बाकी सात को दूसरे चरण में स्वामित्व पत्र दिए जाएंगे। संयुक्त व्यापार मंडल समिति के प्रधान कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि अधिकारियों को आवेदन खारिज करने की बजाय इनके कागज पूरे कराने थे। दुकानों को जागरूक करने की भी जरूरत थी। अधिकारियों की मनमर्जी का एक मामला गत दिनों जिला सचिवालय में कृषि मंत्री कंवरपाल गुर्जर के सामने भी आया था। पूर्व पार्षद लोकेश नांगरू ने आगे आकर ऐसे 10 मामले और मिलने की बात कही थी।
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