सरकार करोड़ों रुपये हर रोज नाले में बहा रही है। तीन करोड़ लीटर पानी को ट्रीट कर नालों में छोड़ दिया जाता है। उद्यमी सालों से एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के पानी की मांग कर रहे हैं, ताकि उन्हें भूजल का दोहन न करना पड़े। इसके लिए उद्यमी सरकार को 10 करोड़ रुपये देने को भी तैयार है। सीएम की हरी झंडी के बाद भी ये फाइल चंडीगढ़ में अधिकारियों की टेबल से नहीं निकल पाई है।
प्रशासन पांच एसटीपी में करोड़ों रुपये खर्च कर हर रोज तीन करोड़ लीटर पानी को शुद्ध करता है और उसे नालों में छोड़ देता है। इससे उद्यमी काफी नाराज है। उद्यमी भूजल का दोहन करने को मजबूर हैं। एसटीपी के पानी को लेकर पंचकूला में भूजल प्राधिकरण की चेयरमैन केशनी आनंद, एचएसवीपी व एचएसआईआईडीसी के चीफ इंजीनियर, पानीपत उपायुक्त, डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम राणा व उद्यमी प्रवीण मितल ने बैठक की।
बैठक में उद्यमियों ने अधिकारियों से एसटीपी के पानी की मांग की। चेयरमैन केशनी आनंद ने इस प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट मांगी और इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं, वहीं उद्यमियों ने मीटिंग में अधिकारियों पर सीएम के आदेशों का उल्लंघन करने के भी आरोप लगाए। मीटिंग में भीम राणा ने यहां तक कह दिया है कि अधिकारी जान बूझकर उनकी फाइलों को दबा चुके हैं जबकि सीएम ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी भी दी है।
उद्यमी जल्द एसटीपी का पानी चाहते हैं क्योंकि पानीपत डार्क जोन में जा रहा है। हर रोज पानीपत में आठ हजार करोड़ लीटर पानी का दोहन होता है। उद्यमियों ने मीटिंग में कहा कि वो इस प्रोजेक्ट पर आने वाले खर्च में अपनी ओर से 8-10 करोड़ रुपये देने को भी तैयार हैं, लेकिन उन्हें पानी दिया जाए।
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण फिलहाल सेक्टर 29 में नहरी पानी की सप्लाई दे रहा है। उद्यमियों के अनुसार प्राधिकरण उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं दे पा रहा है। इसलिए वो भूजल का दोहन करने को मजबूर हैं। सेक्टर 29 पार्ट टू में उद्यमियों को भू जल के दोहन की अनुमति भी नहीं मिल रही है, क्योंकि प्राधिकरण के ये लिखकर देने को तैयार नहीं है कि वो उद्यमियों को पर्याप्त मात्रा में जल की आपूर्ति नहीं कर पा रहे। इसलिए उद्यमी दोनों ओर से फंसे हुए हैं।
मीटिंग में एसटीपी के पानी पर चर्चा हुई है। वो चार साल से ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी की मांग कर रहे हैं। सरकार हर रोज करोड़ों रुपये खर्च कर तीन करोड़ लीटर पानी को शुद्ध करती है और फिर उसे नालों में छोड़ दिया जाता है। अगर उन्हें ये पानी मिले तो वो पैसा देने को भी तैयार है। इस प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री के सामने रखा गया तो उन्होंने भी मंजूरी दे दी थी, लेकिन अधिकारी मनमर्जी से फाइल दबाकर बैठे हुए हैं। उद्योगपति पाइप लाइन पर लगने वाले 8 से 10 करोड़ का खर्च भी वहन करने के लिए तैयार हैं ।
भीम राणा, अध्यक्ष पानीपत डायर्स एसोसिएशन।