पानीपत। पश्चिमी एशिया में तनाव के चलते एलपीजी सिलिंडर के लिए घमासान मच गया है। लोगों को बुकिंग करने के बाद पंजीकृत मोबाइल पर ओटीपी नहीं आ रहा है। ऐसे में लोग सिलिंडर लेने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। यहां पर भी पूरा दिन धक्का खाने के बाद सिलिंडर मिल रहा है। वहीं व्यावसायिक सिलिंडर की आपूर्ति बंद होने पर चाय के खोखे और अन्य स्थानों पर घरेलू सिलिंडर पहुंच गए हैं। ढाबा और होटल संचालक फिलहाल स्टॉक में रखे सिलिंडर का प्रयोग कर रहे हैं। कई जगह लकड़ी और कोयला अपना लिया है।
जिले में 37 गैस एजेंसी हैं। करीब 5.50 लाख गैस उपभोक्ता हैं। हर रोज करीब 11,100 सिलिंडर की घरेलू प्रयोग में खपत हो रही है। अब घरेलू सिलिंडर 25 दिन में मिलने का नियम बना दिया है। इससे बुकिंग नहीं की जाएगी। लोगों को नियमों के बीच भी परेशानी आने लगी है। गैस सिलिंडर के लिए पंजीकृत कराने में परेशानी आने लगी है। लोगों को पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सिलिंडर बुकिंग कराने का ओटीपी नहीं मिल रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचल की एजेंसियों पर सिलिंडर लेने के लिए सुबह ही लोग पहुंच गए हैं। बुधवार को सुबह ही सिलिंडर लेने के लिए लोगों की लाइन लग गई। कई घंटों के इंतजार के बाद भी लोगों को सिलिंडर नहीं मिल पाया है। इस पर लोगों ने गैस एजेंसी कर्मचारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए है। इसके साथ ही कई लोगों को अगले महीने सिलिंडर मिलने की बात कही जा रही है। इससे लोगों में रोष बना हुआ है।
लोगों को ब्लैक में सिलिंडर देने के आरोप
सिलेंद्र, अशोक और बिजेंद्र ने बताया कि वह दो दिनोंं से सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी के चक्कर काट रहे है लेकिन एजेंसी कर्मचारियों द्वारा फोन पर बुक करने का ओटीपी न आने के कारण उन्हें सिलिंडर नहीं दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कई एजेंसी वालों पर सिलिंडर को ब्लैक में देने के आरोप भी लगाए है। उन्होंने बताया कि एजेंसी कर्मचारी मिलीभगत कर लोगों को महंगे दामों में गैस सिलिंडर उपलब्ध करा रहे हैं। इससे सिलिंडर के असली हकदारों को इसकी किल्लत उठानी पड़ रही है। लोगों ने समस्या के निस्तारण के लिए जल्द कोई ठोस कदम उठाने की बात कही है।
शहर में सभी गैस एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में सिलिंडर उपलब्ध है। साथ ही सिलिंडर बुक करने वाले ओटीपी के न आने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। जल्द ही समस्या का निस्तारण किया जाएगा। इससे आमजन को कोई परेशानी न हो।
- दिव्या, डीएफएसओ, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।