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12वीं की परीक्षा को लेकर थम नहीं रहा कयासबाजी का दौर, उलझन में विद्यार्थी

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सीबीएसई यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं की परीक्षा को लेकर कयास बाजी का दौर थम नहीं रहा है। वार्षिक परीक्षाओं को लेकर विद्यार्थी और अभिभावक उलझन में हैं। सीबीएसई से जुडे़ सूत्रों द्वारा दावा किया जा रहा है कि सीबीएसई की 12वीं बोर्ड की परीक्षा 15 जुलाई से शुरू हो सकती हैं। परीक्षा 26 अगस्त चलने की उम्मीद है। इतना ही नहीं, परीक्षा की संभावित तिथियां बताने के साथ ही परीक्षा पैटर्न, अंक प्रणाली और प्रश्न पत्र सॉल्व करने के समय तक में बदलाव के दावे किए जा रहे हैं। सूत्रों से आई जानकारी के मुताबिक केंद्र ने सभी राज्यों से लिखित में जवाब मांगकर उन्हें दो दिन में प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया था। इन प्रस्तावों पर विचार विमर्श करने के बाद 30 मई तक कोई फैसला किया जा सकता है। बता दें 1 जून को शिक्षा मंत्री की सीबीएसई के साथ बैठक होनी है। संभावना है कि इस बैठक में ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
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दूसरी ओर परीक्षाओं के आयोजन को लेकर सीबीएसई 2 तरीकों पर विचार कर रहा है। पहला, सिर्फ मेजर सब्जेक्ट की परीक्षा निर्धारित सेंटरों पर कराई जा सकती है। इन परीक्षाओं के नंबर को आधार बनाकर माइनर सबजेक्ट में भी नंबर दिए जा सकते हैं। इस विकल्प के तहत परीक्षा करवाने के लिए प्री-एग्जाम के लिए एक महीना, एग्जाम और रिजल्ट डिक्लेयर करने के लिए 2 महीने और कंपार्टमेंट एग्जाम के लिए 45 दिन का समय चाहिए होगा। इस विकल्प को तब ही अपनाया जा सकता है, जब सीबीएसई बोर्ड के पास 3 महीने की विंडो हो।
दूसरे विकल्प में सभी सब्जेक्ट्स की परीक्षा के लिए डेढ़ घंटे अर्थात 90 मिनट का समय निर्धारित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही पेपर में सिर्फ ऑब्जेक्टिव या शॉर्ट क्वेश्चन ही पूछने की सलाह दी है। इस तरह 45 दिन में ही परीक्षा करवाई जा सकती है। इसमें कहा गया है कि 12वीं के बच्चों के मेजर सब्जेक्ट की परीक्षा उनके ही स्कूल में ले ली जाए। साथ ही, एग्जामिनेशन सेंटर्स की संख्या बढ़ाकर दोगुनी कर दी जाए। सुझावों में कहा गया है कि एग्जाम में एक पेपर भाषा से संबंधित और 3 पेपर इलेक्टिव सब्जेक्ट का रखा जाए। 5वें और 6वें सबजेक्ट के नंबर इलेक्टिव सबजेक्ट में मिले नंबर के आधार पर दिए जाएं।
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कोरोना होने पर परीक्षा न दे पाने पर एक मौका और
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जिन जगहों पर कोरोना महामारी से हालात ज्यादा खराब नहीं हैं, वहां पहले फेज में परीक्षा करवाई जानी चाहिए। बाकी, बचे इलाकों में दूसरे फेज में परीक्षा करवाएं। दोनों फेज के बीच 14 दिन का गैप होना चाहिए। यदि कोरोना संक्रमण के कारण कोई छात्र परीक्षा नहीं दे पाता है तो उसे एक मौका और मिलना चाहिए।
क्या कहते हैं विद्यार्थी, शिक्षक और प्राचार्य
परीक्षाओं के आयोजन को लेकर अब बच्चे असमंजस में हैं। विद्यार्थी मई में तय की गई परीक्षाओं के लिए तैयार थे, लेकिन अब उनका मन बदल चुका है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन उनके प्रेक्टिकल परीक्षा के आधार पर किया जा सकता है। उसी आधार पर विद्यार्थियों का अंक निर्धारण किया जा सकता है।
-दिव्या, छात्रा।
12वीं की परीक्षाओं को लेकर सीबीएसई ने स्पष्ट कर दिया है कि एग्जाम जरूर होंगे। सभी बच्चों को परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। परीक्षा मुख्य तीन विषयों की हो सकती है। इसलिए विद्यार्थी मुख्य विषयों पर फोकस करें। मुख्य विषयों में प्राप्त अंकों के आधार पर बाकी विषयों में अंक दिए जाएंगे।
-सुजाता मुंजाल, एचओडी, गणित, आर्य बाल भारती स्कूल, पानीपत।
12वीं की परीक्षा को लेकर हालांकि अनिश्चितता बनी हुई है। अंतिम निर्णय 1 जून तक लिया जा सकता है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष तैयारी के साथ सीबीएसई बोर्ड की ओर से 19 विषयों के एग्जाम आयोजित कराए जा सकते हैं। 12वीं की परीक्षाएं आयोजित की जानी चाहिए, क्योंकि परीक्षा के बिना विद्यार्थियों का मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। मुख्य विषयों के पेपर लिए जा सकते हैं। सही अंक निर्धारण होने पर विद्यार्थियों को कॉलेजों में भी एडमिशन लेने में आसानी होगी।
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-रेखा शर्मा, प्राचार्य, आर्य बाल भारती पब्लिक स्कूल, पानीपत।
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