माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। सावन के पहले सोमवार को शहर के शिवनगर में सामने आई घटना ने हर किसी को झकझोर दिया। चार बेटियों की विधवा मां ने बेटे को जन्म देने के बाद करीब ढाई घंटे तक ममता और लोकलाज के बीच संघर्ष किया। आखिरकार सामाजिक डर ममता पर भारी पड़ गया और महिला ने जन्म के महज ढाई घंटे बाद नवजात बेटे को प्लास्टिक के कट्टे में बांधकर कूड़े के ढेर में फेंक दिया। हालांकि एक आवारा कुत्ते ने बच्चे को कट्टे से बाहर निकालकर उसकी जान बचा ली।
पुलिस पूछताछ में महिला ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले उसके पति की मौत हो गई थी। इसके बाद एक दूर का रिश्तेदार युवक उसे पानीपत लेकर आया और शिवनगर में किराये पर कमरा दिलाया। वह फैक्टरी में मजदूरी करने लगी। इसी दौरान युवक का उसके घर आना-जाना बढ़ गया और दोनों के बीच संबंध बन गए। महिला के अनुसार, इसी कारण वह गर्भवती हुई।
महिला ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान बच्चों और आसपास की महिलाओं के सवालों से बचने के लिए वह बीमारी का बहाना बनाती रही। पेट दिखाई देने पर भी उसने किसी को सच्चाई नहीं बताई। काम से लौटने के बाद वह अधिकतर समय कमरे में ही रहती थी।
पुलिस के सामने महिला ने हाथ जोड़कर कहा कि उससे गलती हो गई। उसने बताया कि बच्चे के जन्म के बाद वह डर गई थी और लोकलाज के कारण उसने यह कदम उठा लिया।
भगवान शिव ने प्रसाद के रूप में दिया बच्चा, बेटे की तरह पालूंगी : सुधा
शिवनगर निवासी सुधा जिंदल ने बताया कि सोमवार सुबह जब वह बाहर निकलीं तो उन्होंने देखा कि एक कुत्ता प्लास्टिक के कट्टे के पास खड़ा था। पास जाकर देखने पर कट्टे में नवजात बच्चा मिला। बच्चे की आहार नाल भी जुड़ी हुई थी।
उन्होंने तुरंत अपनी पुत्रवधू पिंकी को तौलिया लाने के लिए कहा। इसके बाद बच्चे को तौलिया में लपेटकर सीने से लगाया और अस्पताल पहुंचाया। सुधा जिंदल ने बताया कि उनके दो बेटे हैं। सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव के प्रसाद के रूप में यह बच्चा मिला है। वह इसे अपने तीसरे बेटे की तरह पालना चाहती हैं।
घटना के बाद कॉलोनी में जमा हुई भीड़
जिस मकान में महिला किराये पर रहती है, वहां करीब 35 परिवार रहते हैं। घटना की जानकारी मिलते ही कॉलोनी के लोग हैरान रह गए। कुछ ही देर में गली में लोगों की भीड़ जमा हो गई। हर कोई इस घटना को लेकर चर्चा करता नजर आया।
बच्चे को गोद लेने के लिए आने लगे फोन
नवजात को लेकर बाल कल्याण समिति के पास भी लोगों के फोन आने शुरू हो गए हैं। समिति की सदस्य किरण मलिक और ममता शर्मा ने बताया कि बच्चे को गोद लेने के लिए अब तक 10 से 15 फोन आ चुके हैं। फिलहाल बच्चा समिति के संरक्षण में है और उसकी सेहत को प्राथमिकता दी जा रही है। बच्चे का उपचार चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है।