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Panipat News: आजादी से पहले आई थी हनुमान स्वरूप बनने की परंपरा

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पानीपत। जिले में हनुमान स्वरूप बनने की अनूठी परंपरा है। इसमें पुरुष नारंगी रंग के 15-20 किलोग्राम के हनुमान मुखौटे पहनकर भगवान का रूप धारण करते हैं।
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लोग इनकी हनुमान का अवतार मानकर पूजा करते हैं। हनुमान स्वरूप बनने की परंपरा आज से नहीं बल्कि आजादी से पहले से चली आ रही है। अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान पहले पाकिस्तान में शुरू हुई थी। लोग सरहिंद के पास हनुमान का स्वरूप धारण करते थे। विभाजन के बाद पानीपत में परंपरा चली आ रही है।
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दशहरा के समय हर गली में हनुमान सभा बैठ जाती है। इसी तरह का उत्साह इस बार हनुमान जन्मोत्सव बना हुआ है। हनुमान स्वरूप धारण करने से पहले विधिपूर्वक पूजा और व्रत कर रहे हैं। वे राम परिवार की सेवा के लिए पिछले कई सालों से हनुमान स्वरूप बन रहे हैं और भगवान राम की परिवार समेत सेवा कर पुण्य कमा रहे हैं और सात्विक जीवन जीकर लोगों को भक्ति का संदेश दे रहे हैं। उनका मानना है कि उन्हें हनुमान स्वरूप बनकर खुशी व शांति मिलती है। यदि सच्चे मन से भक्ति व सेवा की जाए तो भगवान भक्तों की तुरंत सुनते हैं। संवाद
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