पानीपत। बांके बिहारी ज्ञानेश्वर मंदिर अंसल में चल रही श्रीमद्भागवत का शुक्रवार को पांचवें दिन कथावाचक डॉ. अशोक पारीक ने श्रीकृष्ण लीला के कई प्रसंगों का वर्णन किया। इस दौरान उन्होंने कृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रसंग का वर्णन किया तो श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। वहीं मंदिर नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की घोष से गूंज उठा।
कथावाचक डॉ. अशोक पारीक ने कहा कि परमात्मा जिसके जीवन में आ जाते हैं। उनका जीवन आनंद से भर जाता है। आज व्यासपीठ से पूज्य महाराज ने लिव इन रिलेशनशिप पर समाज के सामने गंभीर चर्चा की। जीवन में किस प्रकार का आचरण करना यह प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन ऐसी स्वतंत्रता जिससे मानव संस्कारहीन बनें। उस स्वतंत्रता पर विचार करना चाहिए। एक जीवन साथी अच्छा नहीं लगा तो किसी दूसरे के साथ रहे और दूसरा भी अच्छा नहीं लगा तो किसी तीसरे के साथ रहे, यह मानवीय संस्कार नहीं है। बाल्यावस्था से ही बच्चों को गीता, भागवत, रामायण आदि धार्मिक ग्रंथों से जोड़कर रखने से बालक आगे जाकर समाज व संस्कार विरुद्ध कदम उठाने से पूर्व विचार करते हैं।
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ज्ञानेश्वर बांके बिहारी मंदिर में श्रीमद्भागवत कथा करते डॉ. अशोक पारीक। संवाद