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समर्पण का भाव गुरुकुल की शिक्षा का आदर्श स्वरूप : देशराज शर्मा

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समालखा। पट्टीकल्याणा स्थित सेवा साधना केंद्र में विद्या भारती के तीन दिवसीय प्रांतीय आचार्य सम्मेलन का रविवार से आगाज हो गया। इसमें विद्या भारती के 70 विद्यालयों के लगभग 1250 आचार्य भाई-बहन समेत करीब 1500 लोग शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।इस दौरान विद्या भारती अखिल भारती शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता व समर्पण का भाव गुरुकुल की शिक्षा का आदर्श स्वरूप है। उसी का स्वरूप विद्या भारती है।
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हिंदू शिक्षा समिति के प्रदेश महामंत्री संपूर्ण सिंह ने अतिथियों का परिचय लेकर उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिपेक्ष्य में शिक्षा प्रमाणपत्र और नौकरी पाने का साधन बन गई है। शिक्षा का उद्देश्य व्यक्तित्व का विकास व चरित्र निर्माण करना है । विद्या भारती इस प्रकार की शिक्षा देने में मील का पत्थर साबित होगी। पूर्व आईपीएस शक्ति पाठक ने कहा कि बड़ा परिवार समर्थवान व भाग्यवान होता है । विद्या भारती की ओर से आयोजित किए इस प्रकार के प्रांत स्तरीय सम्मेलन मील का पत्थर साबित होंगे ।
विद्या भारती के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर ने कहा कि जब जब इतिहास ने करवट बदली है, उसने आने वाली सुबह का स्वागत किया है। इसी से हम विश्वगुरु बनने का विश्वास जता रहे हैं। देश का विकास गुणवतापूर्वक शिक्षा के मार्ग पर ही निर्भर करता है। आदर्श शिक्षक ही अपने ज्ञान से संस्कारवान विद्यार्थी का निर्माण करता है। ज्ञान व शिक्षा का कोई विकल्प नहीं हो सकता । समारोह में पूरे प्रांत से विद्या भारती के 70 विद्यालयों के लगभग 1250 आचार्य, अभिभावकों, पूर्व छात्रों, प्रबंध समिति के सदस्य शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विद्या भारती 1952 में शिक्षा के क्षेत्र में आई। इसका उद्देश्य संस्कारित शिक्षा देना रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल धन उपार्जन का साधन नहीं है। इस मौके पर विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद चंद्र महंत, क्षेत्रीय संगठन मंत्री विजय नड्डा, डॉ. कैलाशचंद शर्मा, प्रो. दीप्ति धर्माणी, जम्मू कश्मीर के पूर्व आईपीएस शक्ति पाठक, हिंदू शिक्षा समिति हरियाणा के वरिष्ठ अध्यक्ष डॉ. ऋषिराज वशिष्ठ, मौजूद रहे।
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