समालख (पानीपत)। राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने कहा कि शिक्षा केवल रटने और अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह छात्रों में नैतिक मूल्य, आलोचनात्मक सोच और नवाचार की भावना को विकसित करती है। इसलिए हमें पढ़ाई करने के साथ मूल्य आधारित और समावेशी शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। ये विचार उन्होंने रविवार को समालखा के पट्टीकल्याणा गांव स्थित सेवा साधना केंद्र में आयोजित तीन दिवसीय प्रांतीय आचार्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वीडियो कांफ्रेंसिंग पर लोगों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस कार्यक्रम का आयोजन विद्या भारती हरियाणा की ओर से किया गया। जिसमें प्रदेशभर के शिक्षक और रहे। इस कार्यक्रम में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय बारिश के कारण शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने मूल्य आधारित और समावेशी शिक्षा के साथ उद्योग की उभरती जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा देने की बात कही।
उन्होंने अपने वकतव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ नैतिकता, सामाजिक जिम्मेदारी और वैश्विक कार्य बल की मांगों के अनुरूप कौशल से लैस करना होगा। शिक्षकों को करुणा और ज्ञान के साथ विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना होगा। उन्होंने स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुधार, डिजिटल लर्निंग टूल्स के एकीकरण, मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति और व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में विद्या भारती भारत का सबसे बड़ा संगठन है। जो बच्चों में शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को प्रदान कर रहा है। उन्होंने कहा कि संस्थान की ओर से संचालित लगभग 25 हजार शिक्षण संस्थानों में 1.50 लाख आचार्यों की ओर से लगभग 32 लाख विद्यार्थियों को शिक्षा दी जा रही है। उन्होंने विद्या भारती के शैक्षिक सुधारों और शिक्षक उत्कृष्टता को प्रोत्साहन देने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रांतीय आचार्य सम्मेलन जैसे मंच राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जो शैक्षणिक नवाचार और सर्वाेत्तम प्रथाओं पर विचार-विमर्श को बढ़ावा देते हैं।