संवाद न्यूज एजेंसी
सनौली। धान की पैदावार और भाव में कमी के चलते किसानों के लिए पराली के भाव में दस गुना बढ़ोत्तरी से किसानों को राहत मिली है। जिले में पराली जलाने के पिछले साल के मुकाबले इस बार कम मामले सामने आए। इनमें से पराली जलाने पर मामला दर्ज कर किसानों पर कृषि विभाग द्वारा जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
कृषि विभाग की ओर से पराली नहीं जलाने के लिए किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया गया। जिसमें विभाग द्वारा किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान व फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर विस्तार से जानकारी दी गई। पिछले साल धान की एक एकड़ पराली का भाव दो हजार से लेकर 2500 रुपये था जोकि इस बार अब बढ़कर दस से 12 हजार रुपये तक पहुंच चुका है। जिले से रोजाना ट्रैक्टर ट्रालियों में पराली को सनौली बार्डर से लगते यूपी के गत्ता मिलों और सूखे चारे के लिए लेकर जा रहे हैं। पिछले माह से ही यूपी के व्यापारी पानीपत जिला में गांव-गांव जाकर पराली खरीद रहे हैं। रविंद्र कुमार ने बताया कि गोशालाओं में गेहूं की तूड़ी खत्म होने को है। अब तीन से चार महीने पराली को ही सूखे चारे के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इस बार पराली ज्यादा महंगी हो गई है। ऐसे में गोशालाओं के खरीदने में सक्षम नहीं है। कृषि विज्ञान केंद्र ऊझा के प्रभारी डाॅ. सतपाल सिंह ने बताया कि पराली जलाने के मामले इस बार कम हुए है और कृषि विभाग द्वारा चलाए गए जागरूकता अभियान से किसान जागृत हुए है। किसान फसल अवशेष प्रबंधन को भी अपना रहे है। उन्होंने कहा कि पराली को प्रयोग गत्ता मिलों व सूखे चारे के रूप में अधिक होने से पराली का भाव इस बार बढ़ा है।