शीतकालीन अवकाश में विद्यार्थियों को ग्रह कार्य देने के लिए शनिवार को बालवाटिका-3 से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए संवाद (पीटीएम) कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थी अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे। जहां उनका स्वागत किया गया। अध्यापकों ने बताया कि बच्चों को पढ़ाई के साथ ही संस्कारवान बनाने के लिए इस बार गृह कार्य में बदलाव किया है।
विद्यार्थियों को लिखने या रटने की प्रवृति का नहीं, अनुभव आधारित ग्रह कार्य दिया जाएगा। जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी सुभाष चंद्र भारद्वाज ने बताया कि स्कूलों में एक से 15 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। इसमें दिए जाने वाले ग्रह कार्य में विद्यार्थी के साथ परिवार की भूमिका अहम होगी। जिसमें नाना-नानी, दादा-दादी व घर के वरिष्ठ सदस्य मेंटर की भूमिका अदा करते हुए अपने अनुभव के आधार पर नई पीढ़ी को संस्कार, मार्गदर्शन, दक्षता, कौशल व्यवहार कुशलता प्रदान करेंगे। यह गतिविधियां विद्यार्थियों को पढ़ने-लिखने, गणना कौशल देने के साथ आंकलन लगाना, एकीकरण, कहानी कहना, प्रस्ताव बनाना, देखना व समझना भी सिखाएंगी। अध्यापकों ने पीटीएम में पहुंचे अभिभावकों के साथ चर्चा कर ग्रह कार्य में किए बदलाव व इसके उद्देश्यों से अवगत कराया। विद्यार्थी के समग्र प्रदर्शन पर भी चर्चा की गई।
अपनी पीढि़यों की जानकारी हासिल करेंगे विद्यार्थी
शिक्षा विभाग की तरफ से तैयार गृहकार्य में विद्यार्थियों को अपनी पीढि़यों, उनकी परंपरा, खान-पान से संबंधित जानकारी प्राप्त करनी होगी। ग्रह कार्य ऐसे तैयार किया है कि विद्यार्थी मोबाइल व टेलीविजन से दूरी बनाए रखे व व्यस्त रह सके। इस बात का ध्यान रखा गया है कि गृह कार्य परिवार के बड़े सदस्यों के बिना पूरा होना संभव न हो। सभी गतिविधियां सर्द मौसम व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई हैं। इससे बच्चों के रटने की प्रवृत्ति कम होगा। दिया गया ग्रह कार्य अनुभव आधारित होगा। जिससे बच्चों का परिवार के बड़े सदस्यों के साथ संवाद भी बढ़ेगा।