पानीपत। पूर्वियान घाटी स्थित ऐतिहासिक स्वयंभू प्रकटेश्वर हनुमान मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 1761 में हुई पानीपत की तीसरी लड़ाई के समय मराठा सेना मंदिर के किले पर ही ठहरी थी। प्राचीन समय से स्थापित हनुमान मंदिर की दो साल पहले ही पुन: स्थापना की गई है। प्राचीन समय से दो साल पहले तक मंदिर में भगवान सिंदूर हनुमान की मूर्ति ही स्थापित थी और उन्हीं की पूजा मंदिर में की जाती थी। दो साल पहले ही पुर्न स्थापना के बाद मंदिर में संपूर्ण राम पंचायत की स्थापना की गई है। मंदिर में देश के कोने-कोने से भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए पूजा करने आते हैं।
पूर्वियान घाटी पचरंगा बाजार स्थित प्रकटेश्वर हनुमान मंदिर व ब्राह्मण परिवार के अध्यक्ष देव नारायण उपाध्याय ने बताया कि भगवान हनुमान मंदिर के किले से स्वयं प्रकट हुए थे। प्राचीन समय से ही मंदिर में सिंदूरी हनुमान की पूजा की जाती है। एक बार दिल्ली से आए श्रद्धालु ने भगवान हनुमान से बेटे की मनोकामना की थी। भगवान की कृपा से जल्दी ही उसे बेटी की प्राप्ति हुई। तब वह श्रद्धालु अपनी श्रद्धानुसार बाबा के सिर पर सोने का कुजूम लगाकर गया था। तब से उस कुजूम की भी पूजा की जाती है। श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने पर बाबा का शुक्रिया करने के लिए भोग लगाकर अवश्य जाते हैं।
आज करवाया जाएगा हनुमान लला को नगर भ्रमण-
हर साल की तरह इस साल भी हनुमान जयंती पर विशाल नगर भ्रमण का आयोजन किया जाएगा। बाबा को पालकी में बैठाकर पूरे शहर का भ्रमण करवा जाएगा। मंदिर के प्रधान युधिष्ठिर शर्मा, रमेश बंसल ने बताया कि शनिवार 12 अप्रैल को हनुमान जयंती पर सुबह मंदिर में हवन किया जाएगा। पालकी में भगवान हनुमान लला को नगर भ्रमण करवाया जाएगा। पालकी में सवार होकर हनुमान लला साईं बाबा चौक शिव मंदिर से रश्मि सवार होकर कर नगर भ्रमण करेंगे। दोपहर बाद तीन बजे भगवान का रथ खींच कर उनकी शोभायात्रा निकाली जाएगी।