पानीपत। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 2023 में हुई हत्या के मामले में बाल सुधार गृह में बंद आरोपी 15 वर्षीय किशोर को राहत दी है। बोर्ड ने पढ़ाई पूरी करने के लिए किशोर को एक मौका देते हुए प्रोबेशन बॉन्ड पर रिफॉर्म करने के आदेश दिए। छह माह तक किशोर के चाल चलन पर नजर रखी जाएगी। बोर्ड ने अपने आदेश में कहा कि किशोरावस्था में की गई गलतियों को आजीवन अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मतलौडा थाना क्षेत्र में 2023 में एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। मृतक की पत्नी और उसके प्रेमी ने वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें अहर गांव निवासी आरोपी किशोर का नाम भी सामने आया था। सीसीटीवी फुटेज में वह घटना स्थल के पास नजर आया था। जांच में सामने आया था कि आरोपी किशोर ने सीसीटीवी कैमरे की केबल काटकर आरोपियों की मदद की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर बाल सुधार गृह भेज दिया था, जहां पर पिछले एक साल छह माह 18 दिन से वह बंद है। हाल ही में आरोपी किशोर के पिता ने उसकी पढ़ाई का हवाला देते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में राहत के लिए याचिका दाखिल की थी।
बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा सदस्य आसमा कौशिक, अशोक कुमार ने याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बोर्ड ने आरोपी किशोर को सुधार का एक मौका देने का फैसला लिया। बोर्ड ने कहा कि आरोपी किशोर की उम्र मात्र 15 साल है, जिस कारण उसे अच्छा नागरिक बनने का एक मौका दिया जाना चाहिए, जिस पर बोर्ड ने उसे प्रोबेशन बॉन्ड पर रिफॉर्म करने के निर्देश दिए। किशोर को छह माह के लिए रिहा कर दिया। इन छह माह में उसकी सामाजिक आचरण, चाल-चलन पर नजर रखी जाएगी, इसके बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा ने कहा कि कुछ नाबालिग गलत संगत में पड़कर असामाजिक तत्वों के साथ मिलकर गलत काम करते हैं और इसका खामियाजा उन्हें जेल में जाकर भुगतना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उसका पूरा जीवन भी बर्बाद होता है। इस प्रकार के सुधारात्मक निर्णय न केवल संबंधित बालक के भविष्य को सुधारते हैं बल्कि समाज में मानवीय दृष्टिकोण को भी बढ़ावा देते हैं।