पानीपत। राजाखेड़ी गांव में चल रहे चातुर्मास में रोहित मुनि महाराज, श्रेयांस मुनि महाराज व रजत मुनि महाराज ने रविवार को बैंकेट हॉल में प्रवचन दिए। उन्होंने परिवार में बड़ों का सिर पर हाथ होने को कल्पवृक्ष के समान बताया गया।
रोहित मुनि महाराज ने प्रवचन की शुरुआत परमात्मा के गुण गाने से खुशियों की दौलत मिलती है, मन से छल-कपट मिटाने से खुशियों की दौलत मिलती है। दिन रात संवारा करते हो अपने बिगड़े हुए कामों को औरों की बिगड़ी बनाने से खुशियों की दौलत मिलती है... से शुरू किया और बताया कि हमारा पड़ोसी बिल्कुल हमारे जैसा हो।
उसकी फितरत भी हमारे जैसी होनी चाहिए। सुख- दुख में काम आना चाहिए। जिसकी दीवार व काम सांझे हो वह सच्चा पड़ोसी होता है। जो सबसे पहले काम आता। पड़ोसी को सम्मान देना चाहिए ताकि आपको भी सम्मान मिल सके। उसका कभी बुरा ना करें क्योंकि जो दूसरों का बुरा करता है उसका खुद बुरा हो जाता है। सबकी भलाई करें ताकि अपना भी भला हो सके। श्रेयांश मुनि महाराज ने महावीर मेरे अंदर अंधेरा, कर दो चांदना मेरे अंदर अंधेरा। ज्ञान का मन में दीप जला दो, हो जाए सवेरा... पंक्तियों के माध्यम से कहा कि बड़ों का हाथ कल्पवृक्ष के समान होता है। बड़ों के आशीर्वाद रूपी छांव में बैठने वाला कभी दुखी नहीं होता। उसका हर संकट दूर हो जाता है और मन की सभी की मुरादें पूरी हो जाती है। कुमारी शीतल ने गुरु की स्तुति में हो लगन लागी थारे नाम की। कब से देखूं मैं बाट गुरु थारे आण की.. गीत प्रस्तुत किया। राजाखेड़ी एसएस जैन सभा के प्रधान राहुल जैन, मंत्री सुनील जैन व संदीप जैन (छोटू) ने बताया कि चातुर्मास में करनाल, घरौंडा, गोहाना, सोनीपत, गुर्जरखेड़ी, गन्नौर से भी श्रावक प्रवचन सुनने के लिए पहुंचे।