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वार्ड 13 उझा रोड के हालात भी हुए बेहद खस्ता, जमीन से दो फीट ऊपर सीवर के चैंबर, अब बारिश का भरेगा पानी

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सेक्टर-29 बाईपास से लेकर गांव उझा तक बनने वाले रोड के हालात बेहद खस्ता हैं। करीब ढाई किलोमीटर लंबे इस रोड को अमरूत योजना के तहत सीवर लाइन बिछाने के लिए उखाड़ा गया था। जब दोबारा बनाया तो एक फैक्टरी मालिक व निगम के काम के बीच लेवल को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद काम अधूरा छोड़ना पड़ा। अब इस रोड के बीच में करीब सौ मीटर लंबा एरिया बिना निर्माण के ही कच्चा पड़ा है। यहां लगाए गए सीवर के चेंबर जमीन से दो फीट ऊंचे उठाए गए हैं। जो आने जाने में बाधा तो बनते ही हैं, साथ ही इनमेें से निकासी होना तक असंभव है। ये एरिया सड़क के दोनों तरफ से उठा हुआ है। जिसमें निगम की इंजीनियरिंग विंग की भी कमी बताई जा रही है।
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वहीं, हर बार बारिश होने के बाद इस सौ मीटर के टुकड़े में बरसाती पानी भर जाता है। जिससे इस रोड से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। इससे यहां के स्थानीय लोगों में भारी रोष है। इसका समाधान करवाने को लेकर कई बार स्थानीय लोग निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तक कर चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निगम का ये काम उनके लिए सुविधा की बजाए दुविधा साबित हुआ है। बताया जा रहा है कि ये निगम और फैक्टरी के बीच का ये मामला लेवल को लेकर कोर्ट में विचाराधीन है। जिसका कोर्ट से स्टे ऑर्डर लिया गया है।
इन कॉलोनियों और गांव को जोड़ता है यह रास्ता
बाईपास से लेकर उझा तक ये सड़क, सेक्टर 24, संत नगर, शक्ति विहार कॉलोनी, एकता विहार कॉलोनी, साईं कॉलोनी, नलवा कॉलोनी समेत उग्रा खेड़ी, रिसालू, उझा समेत डाडौला गांव को भी जोड़ने का काम करता है। जहां रोजाना हजारों लोग यहां से आवागमन करते थे, अब कुछ ही लोग यहां से आते जाते हैं।
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लोगों से बातचीत
मोटर लगा निकालते हैं गंदा पानी : कपिल
बरसात में यहां दो फीट तक गंदा पानी भर जाने से रास्ता बंद हो जाता है। इसके बाद खुद ही लोग अपने मकान और दुकानों के सामने मोटर लगाकर गंदे पानी की निकासी का काम करते हैं। यह समस्या पिछले दो साल से बरकरार है।
टैंपो तक नहीं आते : रवि
पहले दिन भर यहां ट्रांसपोर्टेशन के साधन चलते थे। अब यहां टैंपो भी बंद हो चुके हैं। लोगों को लेवल से भी कोई मतलब नहीं है। बस कैसे भी यहां पर सड़क बननी चाहिए और निकासी की व्यवस्था होनी चाहिए।
गलत इंजीनियरिंग का परिणाम : अनिल सैनी
यह परिणाम निगम की गलत इंजीनियरिंग का है। शुरुआत में ही निगम को इस प्लानिंग से काम करना चाहिए था कि लोगों के घरों का पानी भी निकल जाए और सड़क भी बन जाए। अधूरी सड़क नासूर बन चुुकी है।
बरसात में सामने आती है सच्चाई : सूखा
बरसात के मौसम में निगम के दावों की हकीकत सामने आती है। जब यहां दो दो फीट तक पानी भर जाता है। आने जाने का रास्ता भी बंद हो जाता है। लोगों को दूसरी गलियों व सड़कों से गुजरना पड़ता है।
दो साल से परेशान हैं लोग : तेजबीर सैनी
सड़क की खुदाई हुए करीब दो साल हो चुके हैं। तब से लेकर अब तक यहां गंदा पानी भर रहा है। लोग परेशान हैं। बरसाती पानी भरने से रास्ता बंद हो जाता है, जिससे लोगों का काम धंधा तक बंद हो जाता है।
बीमारियों का बना डर : सचिन तायल
हर रविवार को भी यहां गंदा पानी जमा हो जाता है। लोगों के घरों को निकासी पानी तक यहीं आता है। वहीं, सीवर के खुले पानी की वजह से माहौल बदबूदार रहता है। इससे बीमारियों को भी डर बना हुआ है।
आपातकालीन स्थिति में भी रास्ता नहीं : रणबीर सैनी
अगर किसी को कोई इमरजेंसी हो जाए तो लोगों के पास आने जाने का रास्ता तक नहीं है। अगर किसी को एंबुलेंस, डॉक्टर की जरूरत हो या ब्याह-शादी में आने जाने की जरूरत हो तो वह आ जा तक नहीं सकता।
निगम का यह काम करीब दो साल से अधूरा पड़ा है। इससे कई कॉलोनियों व कई गांव के हजारों लोग प्रभावित हैं। इसे लेकर दो साल के अंतराल के सभी आयुक्त, विधायक से भी मिल चुके हैं। अब सांसद से भी मुुलाकात की है। आशा है कि अब मामला सुलझ जाएगा ओर लोगों को सुविधा मिलेगी।
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-शिव कुमार शर्मा, पार्षद, वार्ड नंबर 13
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