- चार महीने में 125 मामले संरक्षण अधिकारी कार्यालय में पहुंचे, 8 में ही हुआ समझौता
माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। दंपती के बीच छोटी-छोटी बात पर होने वाला मनमुटाव बाद में अभिमान के टकराव से रिश्तों की डोर कमजोर हो रही है। जिले में संरक्षण अधिकारी कार्यालय में अप्रैल से अब तक 125 मामले पहुंचे हैं। इनमें से केवल आठ में समझौता हो पाया है। बाकी मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए फाइल को आगे बढ़ाना पड़ा है।
जिले में घरेलू हिंसा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय में काउंसिलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। जहां पर लड़का और लड़की पक्ष के बीच काउंसिलिंग कराई जाती है। ज्यादातर मामलों में प्रयास रहता है कि पति-पत्नी के बीच चल रहे झगड़े को समाप्त कर परिवार को जोड़ा जाए। लेकिन, काउंसिलिंग के लिए बुलाई जाने वाली पंचायत अहम की लड़ाई बन जाती है। जिसके चलते न तो लड़का और न लड़की अपनी गलती स्वीकार करने के लिए तैयार होता है।
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केस-1
वीडियो बनाने से रोका तो छोड़ दिया था घर
पानीपत की एक कॉलोनी निवासी युवक की तीन साल पहले करनाल की युवती से शादी हुई थी। शादी के सात माह बाद दंपती के बीच विवाद की स्थिति बन गई। सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने से इन्कार करने पर पत्नी ने पति का घर छोड़ दिया। इसके बाद चार बार दोनों पक्षों की काउंसिलिंग हुई। लेकिन, पति-पत्नी के बीच किसी तरह का समझौता नही हुआ है। जिसके बाद यह मामला अदालत में चला गया।
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केस-2
शराब के नशे में पति करता था मारपीट
किला थाना क्षेत्र की महिला ने संरक्षण अधिकारी को शिकायत देकर बताया कि उसकी शादी 2016 में हुई थी। महिला का आरोप था कि पति शराब के नशे में मारपीट करता है। दोनों पक्षों को कार्यालय पर बुलाकर उनकी काउंसिलिंग कराई गई। लेकिन, तीन बार की काउंसिलिंग के बाद भी दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े हैं जिससे इस मामले में समझौते की गुंजाइश न के बराबर है।
वर्जन
परिवारों के टूटने का सबसे बड़ा कारण पति-पत्नी के बीच अभिमान की लड़ाई है। दोनों एक-दूसरे के सामने झुकने को तैयार नहीं होते। जिस कारण परिवार को बचाने के प्रयास असफल हो जाते हैं। ज्यादातर मामलों में यही देखने को मिल रहा है।
-रजनी गुप्ता, संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी