पानीपत। ताबीज बांधने के बहाने कमरे में ले जाकर 18 वर्षीय युवती से दुष्कर्म करने के दोषी तांत्रिक को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, इसके साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अतिरिक्त सत्र एवं जिला न्यायाधीश गगनदीप मित्तल की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को पांच माह की अतिरिक्त कैद काटनी होगी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने यह फैसला एक वर्ष से भी कम समय में सुनाया है।
जिला न्यायवादी राजेश चौधरी ने बताया कि 20 मार्च 2021 को महिला थाने में एक महिला ने शिकायत दी थी। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी 18 वर्षीय छोटी बेटी के सिर में दर्द रहता था। इस पर वह उसे मूलरूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर स्थित गांव बीप्रीत एवं हाल में सेक्टर-25 निवासी तांत्रिक लतीफ उर्फ अब्दुल के पास ले गईं। उसने बताया कि बेटी पर भूत-पिशाच का साया है। एक ताबीज बांधना पड़ेगा, जिसका खर्च 10 हजार रुपये आएगा। उन्होंने तांत्रिक को छह हजार रुपये पहले दे दिए। इसके बाद उसने तीन दिन बाद ताबीज बांधने के लिए बुलाया।
वर्ष 2021 की 19 मार्च को फैक्टरी में काम के दौरान तांत्रिक का कॉल आया और बेटी के बारे में पूछा। इस पर तांत्रिक को घर भेज दिया। घर पर उसकी बेटी और पुत्रवधू थी। तांत्रिक ने बेटी को पानी में नशीली दवा मिलाकर बेहोश कर दिया। पुत्रवधू के सामने ही वह बेटी को कमरे में गया और कहा कि ताबीज बांधने के दौरान वह कमरे में अकेला ही रहेगा। इस दौरान उसने बेटी के साथ दुष्कर्म किया। फैक्टरी से लौटने पर बेटी ने आपबीती बताई। पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद तांत्रिक को 21 मार्च को गिरफ्तार किया और 22 मार्च को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था।
न्यायालय ने की टिप्पणी, दुष्कर्म सिर्फ महिला ही नहीं बल्कि पूरे समाज के साथ अपराध
न्यायाधीश डॉ. गगनदीप मित्तल की अदालत ने सजा सुनाने के साथ ही टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म सिर्फ महिला ही नहीं बल्कि समाज के साथ अपराध है। यह महिला के पूरे मनोविज्ञान को नष्ट कर देता और भावनात्मक तौर पर गंभीर संकट में डाल देता है। यह मानव के अधिकार के प्रति अपराध है।