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शौचालय में जाकर निगला जहर, ऑफिस में दुर्गंध आने पर पूछा तो पता चला

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पानीपत। बिशन स्वरूप कॉलोनी स्थित निजी अस्पताल के बाहर विलाप करती हुई मृतक की पत्नी सीमा व उनके सा - फोटो : Panipat
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समालखा/पानीपत। बिजली निगम के समालखा डिवीजन के कार्यालय में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ने शौचालय में जाकर जहर खा लिया। इसके साथ ही कार्यालय में जहर की दुर्गंध फैल गई। स्टाफकर्मियों डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के पास पहुंचे तो उन्होंने कहा कि मैंने जहर खा लिया है। इतना कहते ही उन्होंने बची हुई पांच गोली टेबल पर रखी और चार पेज का सुसाइड नोट भी स्टाफकर्मियों को पकड़ा दिया ।
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समालखा डिवीजन में तैनात जेई राधे कृष्ण ने बताया कि दुर्गंध आने पर वह डिप्टी सुपरिंटेंडेंट चक्रवर्ती शर्मा के पास गए थे। वह गर्दन झुकाए परेशान बैठे थे, चेहरा नीला पड़ता जा रहा था। पूछने पर उन्होंने जहर की तीन से चार गोली खाने की बात कही। तुरंत ही एंबुलेंस बुलाई और अस्पताल के लिए रवाना हुए। रास्ते में चक्रवर्ती कहते जा रहे थे कि तुम्हारा भाई बेकसूर है, उसे झूठे केस में फंसाया जा रहा है। फिर निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। जेई ने चक्रवर्ती शर्मा की ओर से दिए सुसाइड नोट और बची हुई जहर की गोलियां समालखा पुलिस को सौंप दी।
डिप्टी सुपरिंटेंडेंट की पत्नी ने पुलिस को दी शिकायत-
समालखा थाना पुलिस को दी शिकायत में करनाल के हांसी रोड स्थित शिवाजी कॉलोनी निवासी चक्रवर्ती शर्मा की पत्नी सीमा केस दर्ज कराया है। उन्होंने शिकायत में कहा कि पति समालखा में तैनाती से पहले चार माह बिलासपुर यूएचबीवीएन में रहे। उस दौरान एक्सईएन नीरज कांबोज, एलडीसी राघव वधावन, हेड क्लर्क राकेश नंदा और अकाउंटेंट ने मिलकर गबन किया और पति पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस वजह से वह तनाव में थे। पति पर गबन की गई रकम देने का दबाव बनाया जा रहा था।
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चार पेज सुसाइड नोट
चक्रवर्ती शर्मा ने एसएसपी पानीपत के नाम लिखे सुसाइड नोट में कहा है कि वह 22 सितंबर 2021 को प्रमोशन पाकर सब डिवीजन रामनगर से सब डिवीजन बिलासपुर में डिप्टी सुपरिंटेंडेंट के तौर पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि अकाउंट ब्रांच से बाउचर एलडीसी बनाता है। अकाउंटेंट उसका रिकॉर्ड चेक कर सत्यापति करता है और एक्सईएन उसे पास करता था और अंत में वाउचर भुगतान के लिए हेड क्लर्क के पास आता है। इसे ऑनलाइन सिस्टम पर चढ़ाया जाता है। सबमिट होने के बाद एक्सईएन के पास ओटीपी आता है। एक्सईएन ही हेड क्लर्क को ओटीपी देता है। इसके बाद बैंक भुगतान करता है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर डिवीजन में चार माह के दौरान एक्सईएन ने उससे कहा कि प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी चेक एलडीसी राघव को देने है। वह आदेश का पालन करता रहा। उसे नहीं पता था कि एक्सईएन, अकाउंटेंट और एलडीसी गबन कर रहे है। उनका कोई कसूर नहीं है।
ऐसे हुआ खुलासा-
गांव कारद निवासी सुरेश ने आठ फरवरी को पुलिस से शिकायत की थी कि वह टैक्सी चलाता है। अजय और कमल शर्मा ने लोन देने के लिए उसे बैंक खाते का नंबर लिया था। इसके बाद खाते में करीब 3.78 लाख रुपये जमा हुए। फिर दोनों ने बताया कि गलती से खाते में रकम आ गई है। जिस पर उसने रकम वापस कर दी। बाद में खाता चेक करने पर पता चला कि उसे बिजली विभाग से भुगतान हुआ था, जिस पर किसी धोखाधड़ी की आशंका से बचाव के लिए पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस की जांच में मामला यमुनानगर तक पहुंच गया।

पानीपत। मृतक चक्रवर्ती शर्मा द्वारा लिखा गया सोसाइड़ नोट।- फोटो : Panipat

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