पानीपत। प्रतिदिन 50 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई करने वाली गांव डाहर स्थित प्रदेश की सबसे बड़ी शुगर मिल 28 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी करती है। इन दो खूबियों के साथ मिल में अब हर छह माह के सीजन में करीब 30 करोड़ लीटर पानी भी शोधित किया जाएगा। इसके लिए मिल प्रबंधन की ओर से तैयारी लगभग पूरी की जा चुकी है। मिल में बना वाटर लगून शोधित पानी से भरा हुआ है। इसकी क्षमता करीब 2.5 करोड़ लीटर है। इसमें 22500 क्यूबिक मीटर पानी आता है।
इस पानी की पीएच यानी पावर ऑफ हाईड्रोजन वैल्यू सात है। इससे पानी को न्यूट्रल माना जाता है। इसमें सभी प्रकार के मिनरल होते हैं। मिल शुरू होने पर पानी की पीएच वैल्यू अच्छी नहीं थी लेकिन अब दिनों दिन यह बेहतर होती जा रही है। हालांकि अभी इसमें और सुधार किया जाना बाकी है। इस पानी को खेती और बागवानी के लिए सबसे ज्यादा बेहतर बताया गया है। अब इस पानी को ट्रांसपोर्ट करने की तैयारी में मिल प्रबंधन जुट गया है। जल्द ही मिल की बांउड्री के साथ बड़ी-बड़ी पाइपलाइन बिछाकर इस पानी को आसपास के किसानों को खेती के लिए उपयोग में दिया जा सकता है। इसके अलावा शहर के उद्योगपति भी इस पानी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
गन्ना पेराई के दौरान ईटीपी (एफ्यूलेंट ट्रीटमेंट प्लांट) से होकर इस पानी को साफ एवं शोधित किया जाता है। इसके लिए नई शुगर मिल में एक बड़ा लगून बनाया गया है, जिसे सरल भाषा में तालाब भी कह सकते हैं। ईटीपी में ट्रीट होने के बाद पानी को लगून में भरा जाता है। यहां से इस पानी को सप्लाई किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर मिल की ओर से करीब 70 प्रतिशत कार्य पूूरा हो चुका है। बाकी 30 प्रतिशत कुछ ही दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। प्रदेश में ऐसा पानी केवल रोहतक शुगर मिल ही उत्पादित करती आई है लेकिन पानीपत शुगर मिल की क्षमता रोहतक मिल से काफी ज्यादा है।
वर्जन
और बेहतर के लिए बैक्टीरिया बनाएगी शुगर मिल
शुगर मिल के एमडी नवदीप सिंह ने बताया कि पानी की गुणवत्ता ज्यादा बेहतर बनाने के लिए इसमें एक प्रकार के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया जाता है। इसका उत्पादन मिल में ही किया जाएगा। इसके बाद पानी को ईटीपी प्लांट से गुजारकर लगून में भरा जाएगा। इसके बाद पानी की गुणवत्ता काफी बढ़ जाएगी। फिर पानी का इस्तेमाल खेेती या बागवानी के लिए आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए मिल पाइपलाइन भी बिछाएगा।
- नवदीप सिंह, एमडी, शुगर मिल, पानीपत।