संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। सेक्टर 13-17 के वृंदा एनक्लेव में श्रीमद्भागवत कथा सत्संग समारोह का सोमवार को समापन हुआ। कथावाचक पंडित राधे-राधे महाराज ने कथा सुनाई। महाराज ने बताया कि कई लोग आते हैं कि महाराज हम तो सुदामा ही हैं तो मैं प्रार्थना करता हूं काश आप सुदामा ही हो जाओ। क्योंकि क्या तुमने उस महापुरुष को केवल पैसों से तोला है। लक्ष्मी पति भी जिसके पैरों में बैठ जाए क्या वो गरीब हो सकता है? अपने आंखों के अश्रुओं से जिसके चरण पखार दे क्या वो निर्धन हो सकता है? वो सुदामा है। न जाने आज समाज ने सुदामा को क्या समझ लिया है तीन मुट्ठी तंदुल दिए, तीन लोक की सम्पति, इससे बढ़िया व्यापार क्या? सोने के सिंहासन पर बैठकर भी सुदामा हुआ जा सकता है।
सुदामा धन नहीं है, सुदामा त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। परोपकार की प्रतिमूर्ति हैं। सुदामा गोपनशील हैं। श्रीकृष्ण से उनकी मित्रता है ये बात उन्होंने अपनी पत्नी तक से भी नहीं कही। हमें कोई मिल जाए तो हम तो वो आदमी से बात बाद में करते हैं सोशल मीडिया पर फोटो पहले अपलोड करते हैं। सुदामा ने अपनी मित्रता छुपाकर रखी थी। एक समर्थवान पुरुष में ही ये सामर्थ्य हो सकता है। सुदामा ब्रह्मवेत्ता महापुरुष हैं जो इतनी गरीबी में भी लेने की योजना बनाकर नहीं जा रहा बल्कि देने की योजना बनाकर जा रहा है।