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Panipat News: संपत्ति विभाजित करने पर बनेगी उप प्रॉपर्टी आईडी

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जितेंद्र नरवाल
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पानीपत। प्रॉपर्टी आईडी के विभाजन के लिए परेशानी झेल रहे प्रदेशवासियों के लिए सरकार ने नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) यानी मानक संचालन प्रक्रिया को जारी किया है। इससे अब संपत्तियों के विभाजन आसानी से हो सकेंगे। जिस संपत्ति विभाजन होने पर उप प्रॉपर्टी आईडी बनाई जाएगी। संपत्ति की प्रॉपर्टी और उसकी आईडी का ये विभाजन संपत्ति के क्षैतिज और लंबवत आधार पर किया जाएगा। इसके लिए बकाया प्रॉपर्टी टैक्स और विकास शुल्क का भुगतान भी करना होगा।
इसके लिए सरकार ने एक सीमा भी तय की है। सामान्य मामलों में विभाजन दस दिन में अधिकारियों का करके देना होगा। प्राथमिक मामलों में यानी तत्काल योजना के अंतर्गत आने वाले आवेदनों का दो कार्यदिवस में निपटारा करना होगा। इससे शहर के हजारों उन लोगों को लाभ मिलेगा जो अपनी संपत्ति का बंटवारा, संपत्ति विभाजन और उसका क्रय-विक्रय करना चाहते हैं।
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नई एसओपी में क्षैतिज अर्थात जहां प्लाट क्षेत्र उप विभाजित है और लंबवत अर्थात जहां फ्लोर के अनुसार उप विभाजन होता है, को माना जाएगा। एसओपी में विकल्प है कि मौजूदा प्रॉपर्टी आईडी का क्षेत्र उप विभाजित किया जा सकता है। अगर पहले बनाई गई प्रॉपर्टी आईडी एक से अधिक मंजिलों के लिए है और अब मंजिल के अनुसार उप विभाजन की आवश्यकता है। पहले की प्रॉपर्टी आईडी में दो या अधिक प्लाट या फ्लोर का विलय एक साथ हुआ है, जबकि इनके मालिक अलग हैं।
विभाजन का आवेदन करते समय अगर आवेदक ने संपत्ति की बिक्री का विकल्प चुना है तो नई प्रॉपर्टी आईडी अस्थायी रूप से तीन महीने के लिए ही उपलब्ध रहेगी। प्रॉपर्टी आईडी बनने से लेकर तीन माह तक इस आईडी में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इसके बाद मालिक को तीन महीने के भीतर संपत्ति की रजिस्ट्री निष्पादित करानी होगी।
अगर रजिस्टरी निष्पादित हो जाती है तो प्रॉपर्टी आईडी का विवरण तहसील के वेब हेलरिस सॉफ्टेवयर से ऑटोमेटिक अपडेट हो जाएगा। अगर तीन माह में रजिस्टरी निष्पादित नहीं होती तो बनाई गई नई उप प्रॉपर्टी आईडी अपनी मुख्य आईडी में विलय हो जाएगी।
ये दस्तावेज आवश्यक
प्रॉपर्टी आईडी का विभाजन परिवार में सामान्य के साथ मृत्यु वाले मामलों में भी किया जा सकता है। इसके लिए मालिक का पहचान पत्र, जो प्रमाण पत्र साबित मलकियत का सबूत हो, साइट प्लान, संपत्ति के फोटोग्राफ आदि चाहिए होंगे। वही, मृत्यु वाले केस में मृत्यु प्रमाण पत्र, कानूनी उत्तराधिकारियों के शपथ पत्र भी आवश्यक हैं। आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रहेगी। मालिक को बकाया भुगतान के साथ अपनी संपत्ति को स्वयं प्रमाणित भी करना होगा।
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संपत्तियों के विभाजन को लेकर सरकार ने नई एसओपी जारी की है। जिससे शहर के लोग अपनी मुख्य संपत्ति की प्रॉपर्टी आईडी का विभाजन करवा सकेंगे। इससे लोगों को लाभ मिलेगा। - अरुण भार्गव, डीएमसी, नगर निगम।
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