पानीपत। जिला उपभोक्ता आयोग ने बिजली उपभोक्ता को राहत देते हुए 1.22 लाख रुपये के बिल को अवैध ठहरा दिया। आयोग ने बिजली निगम को आदेश दिए कि उपभोक्ता को दिए गए नोटिस को वापस लिया जाए। साथ ही उनसे किसी प्रकार की वसूली न की जाए।
सेक्टर-18, हुडा निवासी कालो देवी ने आयोग में शिकायत दायर कर बताया कि उनके नाम पर बिजली कनेक्शन जारी है। वह नियमित रूप से बिलों का भुगतान करती रही हैं। वर्ष 2022 में निगम के अधिकारियों ने पुराना मीटर हटाकर स्मार्ट मीटर लगा दिया, लेकिन उस समय उन्हें अंतिम रीडिंग की जानकारी नहीं दी। 19 अप्रैल 2024 को निगम की ओर से मेमो नंबर 340 जारी कर 1,22,302 रुपये की मांग की गई। निगम ने पुराने मीटर की रीडिंग में अंतर बताते हुए यह राशि जमा कराने का नोटिस दिया था।
उपभोक्ता ने इसे गलत बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इतनी बिजली खपत नहीं की और औसत बिल 10 हजार रुपये से अधिक नहीं रहा। वहीं, निगम की ओर से जवाब में कहा गया कि पुराने मीटर को एलएल-1 नंबर 10/7243 के तहत जांच के लिए एम एंड टी लैब, करनाल भेजा गया था। जांच में 74,916.4 यूनिट रीडिंग पाई गई, जिसमें से 31,004 यूनिट उपभोक्ता के खाते में देय पाए गए और उसी आधार पर आकलन कर 1,22,302 रुपये की मांग उठाई गई।
आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद पाया कि जांच रिपोर्ट में मीटर से छेड़छाड़ का कोई प्रमाण नहीं है, साथ ही मीटर जांच के समय उपभोक्ता को नोटिस देने या हस्ताक्षर कराने का कोई साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने यह भी माना कि उपभोक्ता नियमित रूप से बिल अदा करती रही हैं और निगम अतिरिक्त खपत का ठोस आधार प्रस्तुत नहीं कर सका।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. आर.के. डोगरा, सदस्य विनीत कौशिक व डॉ. रेखा चौधरी की पीठ ने बिजली निगम को मेमो नंबर 340 को रद्द करते हुए निगम को विवादित राशि की वसूली से रोका। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को वर्तमान बिलों का नियमित भुगतान करना होगा।