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परीक्षा पास कराने के लिए कोचिंग सेंटर से हायर करते थे सॉल्वर

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पानीपत। पत्रकार वार्ता कर जानकारी देते हुए पानीपत एसपी शशांक कुमार सावन। - फोटो : Panipat
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पानीपत। आईआईटी समेत अन्य सरकारी ऑनलाइन प्रवेश परीक्षाओं को पास कराने के गिरोह का सरगना सोनीपत के गांव गोरड़ निवासी अशोक उर्फ शोकी है। वह कोचिंग सेंटर से परीक्षा पास कराने के लिए सॉल्वर हायर करता था। इसके लिए परीक्षा केंद्र संचालकों से साठगांठ कर कंप्यूटरों में रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टाल किया जाता और परीक्षा के दिन परीक्षार्थी का कंप्यूटर कहीं दूर बैठकर गिरोह सॉफ्टवेयर की मदद से रिमोट के जरिए एक्सेस कर लेते थे। परीक्षा केंद्र के कंप्यूटर की स्क्रीन सॉल्वर के कंप्यूटर की स्क्रीन पर खुल जाती थी और वह पेपर हल करते थे। सरगना की अब तक हर परीक्षा लीक या पास कराने के मामले में संलिप्तता मिली है। आरोपी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्रकार से परीक्षाएं कराते थे।
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एसपी शशांक कुमार सावन ने बताया कि यह गिरोह करीब पांच साल से चलाया जा रहा है। आरोपियों ने पांच साल में करोड़ों की संपत्ति बना ली है। सभी का बैंक बैलेंस भी काफी मजबूत है। इन सभी की संपत्तियों को अटैच के लिए कोर्ट को पत्र लिखा जाएगा। साथ ही आय की जांच के लिए इनकम टैक्स विभाग को चिट्ठी लिखी जाएगी। आरोपियों की यह संपत्ति जल्द ही जब्त करवाई जाएगी। आरोपियों ने 2016 में दो लैब राजस्थान में खोली थी, जिसके बाद 2017 में एक लैब में दिल्ली में, 2018 में एक लैब सोनीपत में और 2019 से अभी तक पानीपत में लैब संचालित की है।
कोई करता था लैब का बंदोबस्त तो कोई तलाशता था विद्यार्थी
एसपी ने बताया कि सभी गुर्गों का काम बंटा होता है। कोई गुर्गा लैब का बंदोबस्त करता है। कोई विद्यार्थी तलाशता है, कोई रुपयों की डील करता है तो कोई सॉफ्टवेयर पर काम करता है। एसपी के मुताबिक गिरोह के 20 से ज्यादा और सदस्य इन्हीं क्षेत्रों से जल्द पकड़े जाएंगे।
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इस प्रकार हुई पूरे खेल की शुरुआत
पुलिस सूत्र के अनुसार अशोक के दोस्त परीक्षाओं की तैयारी करते थे। जहां उसे सॉल्वर मिलने शुरू हो गए थे। अशोक ने कोचिंग सेंटर संचालकों के साथ रुपयों में परीक्षार्थियों की परीक्षा के पास कराने साठगांठ करनी शुरू कर दी। अंत में उन्होंने उन्होंने लैब ढूंढी। जिसके बाद पहले आरोपियों ने अपने करीबियों पर यह ट्रिक अपनाकर देखी। सफल होने पर उन्होंने परीक्षा पास कराने के ठेके लेने शुरू कर दिए। जिसके बाद अच्छे रुपये आने शुरू हुए तो उन्होंने अपना जाल बढ़ाना शुरू कर दिया और हरियाणा समेत कई राज्यों में नेटवर्क जोड़ लिया।
ब्लैंक चेक या एडवांस सिक्योरिटी के रूप में लेते थे
आरोपी एक परीक्षार्थी से कम से कम 10 लाख रुपये लेते थे। ज्यादातर परीक्षार्थी परिचितों के जानकार होते थे। जिनसे वह एडवांस के रूप में हस्ताक्षर किए हुए ब्लैंक चेक या नकदी लेते थे। वहीं इसके अलावा परीक्षार्थियों को आश्वासन दिलाते थे कि उनकी परीक्षा केंद्र पर सांठगांठ है, उन्हें कोई परेशानी हुई तो वह खुद जिम्मेदार है और उनकी पेमेंट वापस कर दी जाएगी।
प्री प्लान के तहत होती थी परीक्षा
आरोपियों से खुलासा हुआ है कि वह पहले ही परीक्षा सेंटर पर साठगांठ कर लेते थे। जिस कंप्यूटर पर परीक्षार्थी परीक्षा देगा, उस कंप्यूटर में पहले ही आरोपी जाकर अपना सॉफ्टवेयर डाल देते थे। परीक्षार्थी को बताया जाता था कि उसे कंप्यूटर पर बैठकर क्या करना है। परीक्षार्थी बताए गए प्रोसेस पर क्लिक कर एंटर करता था तो बाहर बैठे हैकर कंप्यूटर को रिमोट एक्सेस पर लेते थे। जिसके बाद परीक्षार्थी अंदर कंप्यूटर पर कैमरे के सामने सिर्फ परीक्षा पास करने का नाटक करता और आरोपी बाहर से परीक्षाएं पास कराते थे। बताया जा रहा है कि आरोपी एक सेंटर पर ज्यादा से ज्यादा पांच परीक्षार्थियों को पास कराने ठेका लेते थे।
गुरुग्राम और एसटीएफ की संयुक्त टीम में ये रहे शामिल
सोनीपत एसटीएफ के इंचार्ज डीएसपी महेश और गुरुग्राम एसटीएफ के इंचार्ज डीएसपी सुरेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर सतीश देशवाल, इंस्पेक्टर वरूण, इंस्पेक्टर मदन लाल, एएसआई सुनिल कुमार, एएसआई सतीश कुमार, एएसआई जोगेंद्र कुमार, एएसआई संदीप, एएसआई निरंजन, एचसी राजेश, एचसी राजीव, एचसी राजेंद्र, ईएचसी धर्मबीर, ईएचसी प्रवीन कुमार, ईएचसी मनोज, ईएचसी अजीत, सिपाही दीपक, मोहित, आशीष, विकास, युधिष्टर, अशोक व सिपाही नरेंद्र शामिल है। एसटीएफ यूनिट की आईजी डीएसपी से पल-पल की रिपोर्ट ले रही है।
पहली बार जेई आईआईटी की कराई थी परीक्षा पास
आरोपियों का इंटरनेट से पूरा जाल जुड़ा हुआ है। आरोपियों से खुलासा हुआ है कि उन्होंने इसी साल जेई आईआईटी की परीक्षाएं पास कराई थी और इसी परीक्षा के मामले में आरोपियों का भंडाफोड़ हुआ और आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास शुरू हुए।
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