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Panipat News: थाईलैंड में नौकरी का झांसा देकर चाइनीज कंपनी को पांच लाख में बेचा, म्यांमार में बंधक बनाकर अमेरिकी नागरिकों से कराई साइबर ठगी

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पानीपत। पानीपत में साइबर स्लेवरी (गुलामी) का मामला सामने आया है। मर्चेंट नेवी में इंजन कैडेट के पद पर तैनात रह चुके पानीपत के विकास नगर के एक युवक को थाईलैंड में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाली एक चाइनीज कंपनी को पांच लाख रुपये में बेच दिया। आरोप है कि जींद के अमित ने पीड़ित को थाईलैंड में 80 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी का झांसा देकर बैंकॉक भेजा था। जहां से चाइनीज कंपनी बंधक बनाकर म्यांमार ले गई और साइबर ठगी कराई गई। कंपनी ने महिला के नाम से आईडी बनाकर अमेरिका के व्यक्तियों को फंसाने का लक्ष्य दिया। वह सेना के एक जवान की मदद से निकलकर रेस्क्यू सेंटर पहुंचा। जहां से आठ जनवरी को युवक डिपोर्ट कर पानीपत भेजा। युवक ने साइबर क्राइम थाना में इसकी शिकायत दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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पानीपत के विकास नगर के अनमोल ने साइबर क्राइम थाने में दी शिकायत में बताया कि वह 12वीं तक पढ़ा है। उसने छह माह का मर्चेंट नेवी का कोर्स कर 2024 में मर्चेंट नेवी में इंजन कैडेट के पद पर तैनात रहा, लेकिन उसकी नौकरी चली गई। 2025 की शुरुआत में उसने इंस्टाग्राम पर थाईलैंड में नौकरी का विज्ञापन देखा, जिसमें लिखे नंबर पर संपर्क किया तो बात करने वाले युवक ने अपना नाम अमित निवासी जींद बताया और कहा कि वह उसे थाईलैंड में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिला देगा। उसे 80 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे और पूरा खर्चा भी कंपनी देगी, उसने नौकरी के लिए हां कर दी, इसके बाद अमित ने उसके दस्तावेज लेकर अपने ही खर्च पर उसका बैंकॉक का टिकट करा दिया। 26 जून की शाम को वह बैंकॉक पहुंचा और अमित को कॉल की। अमित ने उसे एक कार का फोटो भेजा, तुरंत ही एक फॉर्च्यूनर कार एयरपोर्ट पर आई, जिसे एक महिला चला रही थी। महिला ने अपने मोबाइल में उसका फोटो दिखाकर उसे कार में बैठा लिया। जहां से उसे ताक ले जाया गया और रात के लिए एक होटल में ठहराया।
अगले दिन दो अन्य युवक उसे लेने आए। इसी तरह से चार-पांच अन्य युवकों को भी अलग-अलग कार से जंगल में लेकर पहुंचे। जहां पर एक नदी आई तो उन्होंने नाव से नदी पार करने को कहा। जिस पर उसे कुछ गलत होने का एहसास हुआ तो उसने वापस जाने को कहा, लेकिन आरोपियों ने कहा कि अमित ने उसे पांच लाख रुपये में साइबर ठगी करने वाली कंपनी को बेच दिया है, इसके बाद उनके पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए और हथियारों के बल पर नदी पार कराकर म्यांमार के म्यांवाडी में पहुंच, जहां पर उन्हें डीकेबीए आर्मी के जवानों ने अपने कब्जे में ले लिया और केके पार्क नाम से एक बिल्डिंग में छोड़ दिया। जहां पर साइबर ठगी का नेटवर्क चलाने वाली चाइनीज कंपनी काम कर रही थी। कंपनी ने उसे साइबर स्कैम करने की ट्रेनिंग दी। कंपनी ने 25 हजार थाई बात सैलरी तय की थी।
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डेटिंग एप पर अमेरिका के लोगों को फंसाने के लिए कहा
इसके बाद कंपनी ने केके पार्क में उसके ठहरने का प्रबंध किया। साथ ही महिला के नाम से आईडी बनाकर दी, जिसमें उसे डेटिंग एप से नंबर लेकर अमेरिका के लोगों को फंसाने का काम दिया गया। चार माह तक उसे बंधक बनाकर साइबर ठगी कराई। 22 अक्तूबर पर कॉल सेंटर पर कार्रवाई हुई तो उसे दूसरी जगह भेज दिया गया। जहां पर फिर से रेड हुई तो 25 नवंबर को वह आर्मी के जवान से प्रार्थना कर रेस्क्यू सेंटर पहुंचा। जहां पर दो माह रहने के बाद आठ जनवरी को उसे वापस भारत डिपोर्ट किया गया। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मुख्यालय से संपर्क कर आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।

युवक की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले जांच शुरू कर दी गई है। इस मामले में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया गया है। आरोपियों को गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाएगा।
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-अजय कुमार, प्रभारी साइबर क्राइम थाना।
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