कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद के लिए समाजसेवी माताएं घर के साथ ही समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहीं हैं। घर संभालने के साथ ही झुग्गियों और प्रवासी श्रमिकों को भोजन और दवाओं के साथ ही आर्थिक मदद भी पहुंचा रहीं हैं।
कोरोना काल में गरीब परिवारों का ख्याल रख रहीं सरला खुंगर
कोरोना महामारी में अपने और अपने परिवार के साथ ही एल्डिको निवासी समाजसेवी सरला खूंगर गरीब परिवारों का भी ख्याल रख रहीं हैं। वह सुखमणी साहब और योग ग्रुप साथ के काम करती हैं। जिसमें उनको 70 महिलाओं का साथ मिल रहा है। वह पिछले लॉकडाउन से लेकर अब तक गरीबों को खाना बांटते आ रहीं हैं। इनका ध्यान मुख्य रूप से झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब परिवारों पर है। घर पर खाना तैयार कर कोरोना संक्रमितों के घर तक खाना पहुंचाना हो या लंगर लगाकर खाना बांटने का काम हो, इन्होंने इसका जिम्मा उठाया है। जरूरतमंदों को दवाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्हें योग भी सिखाया जाता है। लोगों को प्रेरित किया जाता है, जिससे आपदा से जूझ रहे परिवारों को हताशा से निकाला जा सके। वह कहती हैं कि अपने परिवार को भी देखना है और इस दौर में गरीबों की सहायता भी जरूरी है। दृढ़ निश्चय किया है कि जब तक संभव होगा, गरीबों की मदद की जाएगी। परिवार से भी पूरा सहयोग मिलता है।
पलायन कर रहे श्रमिकों तक भोजन पहुंचा रहीं हैं सविता आर्य
हमेशा पीड़ित बच्चियों और महिलाओं के हक की आवाज उठाने वाली समाजसेवी एवं नारी तू नारायणी उत्थान समिति की अध्यक्ष सविता आर्य कोरोना काल में गरीब परिवारों की मदद कर रहीं हैं। साथ ही शहर के लोगों को भी इस विपदा की स्थिति में मदद के लिए आगे आने को प्रेरित कर रहीं हैं। इन्होंने पिछले लॉकडाउन में 51 परिवारों को गोद लिया था और करीब 2500 लोगों को राशन बांटा था। इस महामारी में करीब 3 हजार महिलाओं को सेनेटरी नैपकीन बांटे गए। लोगों तक दवाएं पहुंचाई गईं। गरीबों के बच्चों के लिए दूध का इंतजाम किया गया। वह कहती हैं कि कोरोना की दूसरी लहर काफी खतरनाक है। जरूरतमंद लोगों की हर संभव मदद की जा रही है। मुख्य तौर पर पलायन करने वाले प्रवासी मजदूरों और स्लम एरिया की बस्तियों में जाकर खाना बांटने का काम किया जा रहा है।
दवाएं और राशन घर-घर पहुंचा रहीं है सरपंच सुमन
पेशे से डॉक्टर और गांव नांगल खेड़ी की सरपंच सुमन इस आपदा की स्थिति में गांव के लोगों तक दवाएं और राशन पहुंचाने का काम कर रहीं हैं। दोनों बच्चे पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया में हैं। परिवार के साथ ही गांव के लोगों की देखभाल की जिम्मेदारी भी है। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को राशन देना हो या खाने के पैकेट वितरित करने हों, सभी काम किए हैं। अपने मेडिकल स्टोर से निशुल्क दवाएं पहुंचाई हैं। जो जारी है। जिनके पास मकान का किराया देने के लिए पैसे नहीं थे, उनकी आर्थिक तौर पर मदद की गई। इस अभियान में उनके परिवार ने पूरा साथ दिया। दूसरों की मदद करने के लिए परिवार से प्रेरणा मिली। इसी के साथ कुछ महिला साथियों ने परोपकार के इस काम में पूरा साथ निभाया।