पानीपत। बिना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट ( एसएलसी) सरकारी स्कूलों में दाखिला लेने वाले निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को अपने पूर्व स्कूलों में लौटना पड़ सकता है। हालांकि अगर वे पूर्व स्कूल से एसएलसी लेकर जमा करा देते हैं, नए स्कूल में ही पढ़ाई कर सकेंगे। विद्यार्थियों को पूर्व स्कूल से एसएलसी लेकर हर हाल में जमा करानी होगी।
शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को एसएलसी जमा करवाने के निर्देश दे दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है।पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार अब बिना एसएलसी के दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं मिल पाएगा। जिन विद्यार्थियों ने पहले बिना एसएलसी के लिए दाखिला लिया था, उन्हें अपने पहले के स्कूल से एसएलसी लानी होगी। असल में, शिक्षा विभाग ने बगैर एसएलसी दाखिले की मंजूरी दी थी, जिसे पलट दिया गया गया है। बगैल एसएनसी प्रोविजनल दाखिले लेने वाले विद्यार्थी एमआईएस पोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं, कोर्ट के आदेशानुसार एमआईएस पर बिना एसएलसी वाले विद्यार्थी मान्य नहीं होंगे।
जिले के हजारों बच्चों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूलों में लिया था दाखिला
जिले के हजारों बच्चों ने निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लिया था। इनमें से कई विद्यार्थी ऐसे थे, जिन्होंने अपने पूर्व स्कूल फीस नहीं भरी और सरकारी आदेश के तहत बगैर एसएलसी के सरकारी स्कूल में दाखिला ले लिया। जिसपर निजी स्कूल हाईकोर्ट चले गए और वहां पर सरकार फैसला पलट दिया गया।
फीस जमा न कराने के कारण निजी स्कूलों ने नहीं दी थी एसएलसी
जिन विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों में प्रोविजनल दाखिले लिए थे, उन्हें निजी स्कूलों ने फीस जमा न कराने के कारण एसएलसी जारी नहीं की थी। ऐसे में विद्यार्थियों के अभिभावकों ने निजी स्कूलों में बकाया फीस जमा कराए बगैर ही सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला करवा दिया था। अब हाईकोर्ट के आदेश जारी होने के बाद इन विद्यार्थियों का दाखिला कैंसल हो जाएगा और इन्हें वापस निजी स्कूलों का रुख करना होगा।
फीस जमा न कराने की स्थिति में नाम नहीं काट सकते निजी स्कूल
राजकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के प्रोविजनल दाखिले रद्द होने के कारण विद्यार्थियों वापस निजी स्कूलों में जाना होगा। निजी स्कूल बकाया फीस की मांग करेंगे। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक फीस जमा नहीं कराने की स्थिति में नाम नहीं काटा जा सकता है। लॉकडाउन में जब निजी स्कूल अभिभावकों से फीस की मांग कर रहे थे, तब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि निजी स्कूल ट्यूशन फीस ले सकते हैं। अगर अभिभावक ट्यूशन फीस भी देने में असमर्थ हैं तो छात्र को स्कूल से नहीं निकाल सकते है। उसे ऑफलाइन-ऑनलाइन कक्षा, रिजल्ट और परीक्षा से वंचित नहीं रखा जा सकता है।
बिना एसएलसी दाखिले करने का शिक्षा विभाग का आदेशों पर हाईकोर्ट द्वारा स्टे लगा दिया गया है। शिक्षा विभाग का आदेश भी आ चुका है। अदालत के आदेश ही मान्य होंगे। बिना एसएलसी के सरकारी स्कूल में दाखिले नहीं होंगे। पहले जिन विद्यार्थियों का अस्थाई रूप से दाखिला किया गया था, उनका पोर्टल पर कोई रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों के दाखिले को रद्द कर दिया जाएगा।
- रमेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, पानीपत।