गांव गांजबड़ की छात्रा साक्षी अपने परिजनों के साथ।
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पानीपत। यूक्रेन में फंसे छात्र मदद की गुहार लगा रहे हैं। कोई हॉस्टल में फंसा है तो कोई बंकर में मदद की आस में है। दूसरी ओर, परिजन बेहद चिंतित हैं। यूक्रेन से लौटी गांव गांजबड़ की बेटी साक्षी ने बताया कि वहां की हालत बहुत खराब है। एक प्लेट चावल छह लोगों को मिलता है। अब वहां भूखे मरने की नौबत आ गई है।
लगातार धमाके सुने जा रहे हैं। जान बचाने के लिए लोग पोलैंड की ओर पैदल ही निकल पड़े हैं। यूक्रेन में फंसे जतिन ने वीडियो कॉल कर बताया कि बंकरों में छुपकर जान बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार से मांग है कि उन्हें जल्द यहां से निकाले। वहीं पोलैंड सरकार भारतीय को अपने देश में आने से रोक रही है, इसलिए चिंता अधिक बढ़ गई है।
साक्षी ने बताया कि रूस लगातार यूक्रेन पर बमबारी कर रहा है। इससे यूक्रेन के लोगों मेें दहशत है। अपनी जिंदगी बचाने के लिए लोग बंकरों, मेट्रो-रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट पर रात गुजार रहे हैं। सभी को मदद का इंतजार है। कुछ लोग पैदल ही पोलैंड की ओर जा रहे हैं लेकिन भारतीयों को जाने से रोका जा रहा है।
विदेश में फंसे छात्र अपने दोस्तों को वीडियो कॉल कर वहां के हालात दिखा रहे हैं। हजारों लोगों की भीड़ पोलैंड की ओर जा रही है। कैसे लोग अपने घरों को छोड़ जान बचाने की कोशिश में जहां-तहां भाग रहे हैं। कोई बंकरों में तो कोई मेट्रो या एयरपोर्ट पर खड़ा उम्मीद लगा रहा है कि कब कोई उन्हें बचाने आएगा। चारों ओर दहशत का माहौल है।
यूक्रेन के डिनप्रो सिटी में गांव बिहौली के रहने वाले जतिन ने वीडियो बनाकर दिखाया कि वे एक हॉस्टल में बंद हैं। भारतीय दूतावास की ओर से भी अभी कोई मदद नहीं मिल रही है। उन्हें रोज बेसमेंट और बंकरों में रात गुजारनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि उनके साथ करीब 500 छात्र यहां फंसे हुए हैं। उन्हें हॉस्टल से बाहर निकलने में भी डर लग रहा है। उन्होंने सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
यूक्रेन में वीडियो के जरिए वहां की भीड़ को दिखाते हुए भारतीय छात्र।- फोटो : Panipat