संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी व्रत शनिवार को है। इस व्रत पर तिल के दान का विशेष महत्व है। इस व्रत को करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है।
गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है और उसे जीवन में वैभव प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस व्रत की महिमा स्वयं श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताई थी। एकादशी व्रत के प्रभाव से जातक को मोक्ष मिलता है और सभी कार्य सिद्ध हो जाते हैं। इससे दरिद्रता दूर होती है। अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता, शत्रुओं का नाश होता है। धन, ऐश्वर्य, कीर्ति व पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता रहता है। इस एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वोच्च माना गया है।
आज व्रत कल होगा पारण : पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि का प्रारंभ 24 जनवरी को शाम 7:25 बजे होगा। यह 25 जनवरी को रात 8:31 बजे तक होगी। उदयगामी तिथि को एकादशी मानते हुए 25 जनवरी को षटतिला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसका पारण अगले 26 जनवरी को होगा। लोगों को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर विष्णु भगवान को खिचड़ी का भोग लगाया जाएगा।
षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व व लाभ : षटतिला एकादशी के दिन लोग तिल का उपयोग छह प्रकार से कर सकते हैं। तिल से स्नान, तिल से तर्पण, तिल का दान, तिल युक्त भोजन, तिल से हवन और तिल मिश्रित जल का सेवन करना चाहिए। तिल का दान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन तिल का उपयोग स्नान, प्रसाद, भोजन, दान और तर्पण में होता है।