संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा (पानीपत)। संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल भोड़वाल माजरी में आयोजित 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन रविवार को आध्यात्मिक जागृति, प्रेम और विश्वबंधुत्व का संदेश दिया गया। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और परिवेश के लोगों का मिलन एकत्व और सद्भाव की मिसाल बना रहा।
निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि वास्तविक आध्यात्मिक जागृति केवल बाहरी सजगता तक सीमित नहीं है, बल्कि विचारों, व्यवहार और भावनाओं में भी चेतना का होना जरूरी है। सच्ची भक्ति बाहरी पहचान की मोहताज नहीं होती। प्रेम, नम्रता, सहनशीलता और सत्य को जीवन में अपनाने से ही भक्ति सार्थक बनती है।
सतगुरु माता ने कहा कि समय के साथ जीवनशैली में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन मनुष्य को सत्य को अपना मूल आधार बनाए रखना चाहिए। सत्संग की सार्थकता तभी है, जब वहां से प्राप्त शिक्षाओं को केवल सुनने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें अपने आचरण और दैनिक व्यवहार में भी उतारा जाए।
निरंकारी राजपिता रमित ने दृष्टिहीन व्यक्ति और लालटेन का उदाहरण देते हुए समझाया कि केवल गुरमुख का बाहरी स्वरूप अपना लेना पर्याप्त नहीं है। जीवन में ब्रह्मज्ञान, प्रेम और समर्पण का प्रकाश निरंतर बना रहना चाहिए। सेवा, सुमिरन और सत्संग के माध्यम से विचारों, भावनाओं और आचरण को बेहतर बनाना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है।
सतगुरु माता को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया
विश्व स्तर पर शांति और सौहार्द के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए चिश्ती फाउंडेशन की ओर से सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज को ग्लोबल पीस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
समागम में आध्यात्मिक जागृति, आत्मसुधार और निष्काम भक्ति का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं को इन शिक्षाओं को जीवन में अपनाकर प्रेम, सद्भाव और विश्वबंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया गया।
निरंकारी समागम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और राजपति रमित । संवाद
निरंकारी समागम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और राजपति रमित । संवाद
निरंकारी समागम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और राजपति रमित । संवाद
निरंकारी समागम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और राजपति रमित । संवाद
निरंकारी समागम में प्रदर्शनी का अवलोकन करते सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और राजपति रमित । संवाद