संवाद न्यूज एजेंसी
समालखा। संत निरंकारी मंडल के 79वें वार्षिक संत समागम में लगभग 1150 दिव्यांग श्रद्धालु पहुंचे हैं। इनके लिए निरंकारी समागम स्थल पर अलग से पंडाल बनाया गया है। जिसे संत विद डिसएबिलिटी (दिव्यांग संत) का नाम दिया गया है। जबकि गत वर्ष इस स्पेशल नीड नाम दिया गया था। निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज ने शनिवार को शिविर में पहुंचकर सबको आशीर्वाद दिया। सतगुरु माता के दर्शन पाकर हर कोई खुश हो गया और खुद को किस्मत वाले बताने लगे।
दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
राकेश चांदना, जेएस चावला व सुरेंद्र सिंह पाली ने बताया कि दिव्यांग श्रद्धालुओं को पंडाल से लाने व ले जाने के लिए गाड़ियों की विशेष व्यवस्था की है। इनके लिए स्टिक्स, व्हील चेयर, मेडिकल सुविधाएं, सामान्य चिकित्सक की सुविधा है। साथ ही इनके रहने व खाने पीने साफ सफाई का ध्यान रखने के लिए सेवादार लगे हैं। बाबा हरदेव सिंह महाराज ने इसे वर्ष 2001 में शुरू किया था। दिव्यांग श्रद्धालुओं की यह सेवा आज विशाल रूप लेती जा रही है।
एक्यूप्रेशर व फिजियो सेवा
संत विद डिसएब्लिटी शिविर में दिव्यांग जनों की एक्यूप्रेशर व फिजियोथैरेपी से सेवा लुधियाना पंजाब से आए दो दिव्यांग भाई रिंकू भंडारी व टिंकू भंडारी भी कर रहे हैं। रिंकू ने बताया कि उनके परिवार में जैनेटिक बीमारी है। जिस कारण उनके पैर व दोनों आंखों में समस्या है। उन्होंने 2004 में योग व एक्यूप्रेशर सीखा। वे इसके बाद बाद से सेवा कर रहे हैं। उसने 1991 में ब्रह्मज्ञान लिया था। पिछले 13 वर्षों से सेवा कर रहे हैं। ब्रह्मज्ञान के बिना कुछ नहीं है। यमुनानगर से फिजियो राजेश कुमार ने बताया कि उनके माता-पिता निरंकारी हैं और बचपन से ही उन्हें निरंकारी समागम में जाने का अवसर प्राप्त हुआ। वह पहले सेवादल में सेवा करते थे, अब दो वर्षों से फिजियोथैरेपी के माध्यम से दिव्यांगजनों सहित अन्य श्रद्धालुओं की सेवा कर रहे हैं। उनके पास समागम के पहले दिन 42 व दूसरे दिन शाम तक 50 श्रद्धालु फिजियोथैरेपी का लाभ ले चुके हैं।
तीन बार एक ही टांग ऑपरेशन
बिहार के बलिया की अंजू श्रीवास्तव तीन बार एक ही टांग का ऑपरेशन करा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वह 2017 से निरंकारी मंडल से जुड़ी हैं। वह माता के दर्शन को तड़प रही थी। आज सतगुरु माता ने स्वयं दर्शन दे दिए। चिकित्सक कहते थे वह बचेगी नहीं लेकिन वह सतगुरु माता के आशीर्वाद से जीवित है। मध्य प्रदेश के सताना की नीलू पोलियोग्रस्त हैं। उन्होंने बताया कि उनको ब्रह्म ज्ञान लेने के बाद उनको मानव तन के मिलने का उद्देश्य पता चला। ब्रह्म ज्ञान में आत्मशक्ति का एहसास होता है। बिहार नवादा के बालकेश्वर प्रसाद ने बताया कि उनको पोलियो है। निरंकारी समागम स्वर्ग से भी सुंदर है। उनके परिवार के पांच सदस्यों ने एक साथ ब्रह्म ज्ञान लिया था। ब्रह्मज्ञान की प्राप्ति के बाद भ्रम की समाप्ति हुई। माता के दर्शन पाकर खुशी का ठिकाना नहीं है। अमरकली ने बताया कि उन्होंने आठ साल पहले ब्रह्मज्ञान प्राप्त किया था। वे दिनभर इसी पंडाल में रहते हैं। यहां सेवादार उनकी देखरेख करती हैं। वह शाम को दूसरे पंडाल में परिवार के अन्य सदस्यों के पास चली जाती हैं। माता के दर्शन से मन गद-गद हो गया।