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नन्हें बच्चों की गुरबानी के साथ शुरू हुआ समागम

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पानीपत। 400वें प्रकाश पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे बच्चों ने भी गाया गीत। - फोटो : Panipat
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पानीपत। गुरु तेग बहादुर के प्रकाश उत्सव की सुबह पानीपत के लिए अलग थी। हरियाणा के इतिहास में सबसे भव्य प्रकाश उत्सव का आयोजन पानीपत के सेक्टर 13-17 ग्राउंड में किया गया। नन्हें बच्चों की गुरबानी के साथ सुबह नौ बजे समागम शुरू हुआ। आठ वर्ष तक के नन्हें बच्चों ने गुरबानी की। नन्हें बच्चों की गुरबानी को देख संगत निहाल हो गई।
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सुबह नौ बजे ही पांच हजार से अधिक संगत पहुंच चुकी थी
सुबह नौ बजे तक सेक्टर 13-17 के ग्राउंड में पांच हजार से अधिक पहुंच गई थी। देखते-देखते ही दोपहर 12 बजे तक पंडाल में 50 हजार से ज्यादा संगत हो गई। पूरे दिन में डेढ़ लाख से अधिक संगत पहुंची। पंडाल में गुरबानी सुनी और प्रसाद चखा।
सामाजिक संस्थाओं और स्कूली बच्चों ने की सेवा
सामाजिक संस्थाओं और स्कूली बच्चों ने प्रकाश उत्सव पर सुबह आठ बजे से सेवा शुरू कर दी। पंडाल के प्रवेश द्वार पर अलग अलग संस्थाए और स्कूली बच्चें आए हुए श्रद्धालुओं को सिर ढकने के लिए केसरी वस्त्र दे रहे थे और कोरोना महामारी से बचने के लिए एन-95 मास्क वितरित कर रहे थे।
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जोड़ा घर में उद्योगपतियों ने भी की सेवा
जोड़ा घर में उद्योगपति ने सेवा की। उद्योगपति के साथ सामाजिक संस्था और अलग-अलग गुरुद्वारे से आए हुए लोगों ने सेवा की। दोनों जोड़ा घर में 50 हजार से ज्यादा जोड़े रखने का व्यवस्था की गई। उद्योगपति नितिन अरोड़ा दिनभर पैर धोने वाले पानी में से बोतल व पन्नियों को अलग करते रहे ताकि किसी के पैर में न लग जाए।
इस तरह श्रद्धालुओं को मिला प्रवेश
पंडाल में प्रवेश करने से पहले ही लोगों को प्रवेश द्वार पसंद आया। स्वर्ण गुरुद्वारे के तर्ज पर भव्य गेट पर घुसने पर से पहले लोगों ने जमकर सेलफी ली और उसके बाद अंदर आए। प्रवेश करने के बाद जोड़ा घर में अपने जूते चप्पल रखवाए। वहीं 100 से ज्यादा नल की व्यवस्था की गई जिसमें लोगों ने हाथ मुंह धोया। कीर्तन हॉल में प्रवेश करने से पहले पैर धोने बनाया गया जहां लोगों ने पैर धोकर प्रवेश किया। सैकड़ों की संख्या में लोग दिनभर भर प्रवेश करते रहे।
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