कड़वे प्रवचन सत्संग के अंतर्गत कवि सम्मेलन में कवियों ने भी एक से बेहतर एक कविताओं को पढ़कर सबको देश व समाज के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया। कवि सम्मेलन में कवियों ने भी अलग से छाप छोड़ी को कड़वे प्रवचनों के साथ मीठे बोला का रस घोल दिया।
कड़वे प्रवचन के अंतर्गत शनिवार को मॉडल टाउन स्थित लिच्ची वाला बाग में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। जिसमें प्रदेश व देशभर के प्रमुख कवियों ने भाग लिया।
कवि दिनेश रघुवंशी ने कहा कि मिटा कर मातृ भूमि की पीर, हराया सलामी दो, वो पूर्ण सारे फर्ज कर आया उन्हें सलामी दो, तिरंगे में लिपटकर घर आया सलामी दो।
उन्होंने दूसरी कविता में कहा कि अगर वर्दी जो अपनी शौर्य अनुमति समझ लेना, तो फिर ये राजनीति उसकी मजबूती समझ लेगी, अगर खाकी यूं ही झुकती तो खादी के चरणों में, शादी भी उसे पांव की जूती समझ लेगी।
कवि शहनवाज हिंदुस्तानी ने कहा कि नाज मुझे खुद पर हो रहा है आज पिया, मेरा ये सिंदूर भारती के काम आया है, आपका ये बलिदान आन-बान और शान मेरी कोख के लिए सबक बन आया है, सात माह का गर्भ झूमझूम कह रहा आज मेरे पापा ने तिरंगा फहराया है।। इसके अलावा कई अन्य कवियों ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति से सबको पाठ पढ़ाया।