आमतौर पर जवान बेटे की मौत के बाद कोई भी माता-पिता खुद को असहाय व लाचार महसूस करता है, लेकिन पानीपत जिले के छोटे से गांव डिकाडला के एक दंपति ने अपने मृत बेटे के अंग दान कर न केवल छह लोगों को नया जीवन प्रदान किया है, बल्कि अपने मृत बेटे को भी अमर कर दिया है।
दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सकों की टीम ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन करके साहिल के माता-पिता को सम्मानित किया।
मैक्स अस्पताल शालीमार बाग नई दिल्ली में मूत्र विज्ञान और गुर्दा प्रत्यारोपण विभाग में वरिष्ठ कंसल्टेंट डॉ. वहीद जमान ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भारत में अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर साल पांच लाख लोगों की जान चली जाती है।
देश की आबादी 1.2 अरब होने के बावजूद यहां प्रति 10 लाख की जनसंख्या पर मात्र 0.08 अंगदाता हैं। आंकड़ों के अनुसार आज भी डेढ़ लाख लोग गुर्दा प्रत्यारोपण की कतार में हैं।
ऐसे में पानीपत के गांव डिकाडला निवासी सुरेंद्र व उसकी पत्नी सुनीता ने नई मिसाल पेश की है। उन्होंने बताया कि इस माह की शुरूआत में सड़क हादसे का शिकार 17 वर्षीय साहिल को अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां डाक्टरों ने की टीम ने साहिल को ब्रेन डैड घोषित कर दिया।
इसके बाद साहिल के पिता ने अस्पताल के सहायक निदेशक डॉ. अनिल कंसल से बात कर अपने पुत्र के अंगदान करने की इच्छा जताई। चिकित्सकों के अनुसार जवान बेटे की मृत्यु के समय परिजनों के लिए इस तरह का फैसला करना बेहद कठिन एवं सराहनीय कदम था।
छह लोगों को मिला जीवनदान
साहिल के अंगदान से छह लोगों को जीवनदान मिला है। मैक्स अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि जिन लोगों को साहिल के अंग चढ़ाए गए हैं, वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि साहिल की एक किडनी इस्ट दिल्ली कृष्णा नगर के एक नौजवान को चढ़ाई गई है, जबकि दूसरी किडनी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी 38 वर्षीय महिला को चढ़ाई गई है। इसी प्रकार साहिल का दिल नजफगढ़ की एक 51 वर्षीय महिला को चढ़ाया गया है।
इसके अलावा साहिल का लीवर दिल्ली के एक 45 वर्षीय व्यक्ति को चढ़ाया गया है। साहिल की आंखें भी एम्स दिल्ली के माध्यम से लोगों को चढ़ाई गई हैं।
50 हजार से अधिक लोगों की ह्रदय रोग के कारण मौत
मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल साकेत के हृदय प्रत्यारोपण और वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइसेस कार्यक्रम प्रभारी डॉ. केवल कृष्ण ने बताया कि भारत में 50 हजार से अधिक लोगों की मौत हृदय रोग के कारण होती है।
जिनमें बहुत से रोगी इस उम्मीद में रहते हैं कि उन्हें कोई हृदय मिलेगा और वह वह नया जीवन व्यतीत कर सकेंगे। साहिल के माता-पिता द्वारा लिए गए फैसले से एक ऐसी मां की जान बची है जो अब अपना पूरा जीवन बच्चों के साथ व्यतीत कर सकेगी। लोगों को इस कदम से प्रेरणा लेने की जरूरत है।
भारत में अंगदान के बारे में तथ्य और आंकड़े
-भारत में अंगों की अनुपलब्धता के कारण हर साल पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है।
-दाताओं की कमी के कारण भारत में हर साल गुर्दे की बीमारी के कारण दो लाख लोगों की मौत हो जाती है।
-दान किए गए हृदय की कमी के कारण हर साल दिल की बीमा से 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है।
-कार्निया अंधापन से 10 लाख लोग पीड़ित हैं और वह प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं।
-भारत में इस समय करीब डेढ लाख लोग गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए इंतजार कर रहे हैं। इनमें से सालाना केवल तीन लाख लोगों का ही प्रत्यारोपण हो पाता है।