पानीपत। गांधी मंडी जैन स्थानक में दो वैरागी आत्माओं सुशील जैन और पावन जैन का अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। इनकी जैन भागवती दीक्षा दो मार्च को रोहतक में होगी। इस दौरान आशीष मुनि ने कहा कि संयम आत्म नियंत्रण और दीक्षा त्याग का मार्ग है।
यह दीक्षा उत्तर भारतीय प्रवर्तक आशीष मुनि महाराज के सानिध्य में और कर्मठ संत पदम मुनि महाराज की निश्राय में होगी। पानीपत में भी यह आयोजन आशीष मुनि महाराज, तत्व चिंतक उत्तम मुनि महाराज, स्वाध्यायी विराग मुनि महाराज, बालचंद महाराज और ठाणे- चार के सानिध्य में होगा।
वैरागी आत्माओं का संक्षिप्त परिचय : 28 वर्षीय वैरागी सुशील जैन पुत्र विमला देवी जैन व रामलाल जैन लुधियाना के भुल्लांपुर गांव से संबंध रखते हैं। इनका मूल निवास हरियाणा के जींद जिले का दनौदा गांव है। 17 वर्षीय वैरागी पावन जैन पुत्र मुकेश जैन व दिलबाग जैन हरियाणा के जींद जिले के बड़ौदा गांव के निवासी हैं।
गांव के महान जैन संत चारित्र चूड़ामणि मायाराम के वंशज हैं। सभा संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि मायाराम महाराज चहल-गोत्रीय जाट परिवार से थे। उनके उच्च कोटि के संयम से प्रभावित होकर उनके गांव के 45 व्यक्ति साधु साध्वियां बने। लगभग नौ हजार जनसंख्या वाला बडौदा गांव पूर्ण शाकाहारी है। मुसलमान बिरादरी के लोग तक भी अंडा तक का सेवन नहीं करते।
आशीष मुनि जी ने कहा कि संयम आत्म नियंत्रण है। संयमी स्व विवेक से जीवन में रही सभी विकृतियों और मानसिक कमजोरियों को दूर करता है। दीक्षा एक त्याग का मार्ग है। इसमें घर परिवार तथा आसक्ति का त्याग किया जाता है। आसक्ति संसार है। कर्म बंध का कारण है। यही तो जन्म मरण कराता है। जन्म मरण के मूल को छेदने के लिए मोह और आसक्ति को त्यागा जाता है।