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सेना की शौर्य गाथा को किया याद

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पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में सेना दिवस के अवसर पर किया गया कार्यक्रम आयोजित। - फोटो : Panipat
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पानीपत। एसडी पीजी कॉलेज में सेना दिवस देश भक्ति के जज्बे और शौर्य गाथाओं को याद करते हुए मनाया गया। इस मौके पर 12 एनसीसी बटालियन सोनीपत की ओर से वेबिनार का आयोजन किया गया। एनसीसी यूनिट को सेना दिवस के महत्व और एनसीसी के उत्तरदायित्वों के बारे में जानकारी दी गई और उनसे कहा गया कि भारतीय सेना का इतिहास अदम्य साहस एवं अनगिनत कुर्बानियों की दास्तां से भरा हुआ है।
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वेबिनार का विषय ‘हमारी सेना हमारा अभिमान और भारतीय सेना में मौजूद अवसर’ रहा। इस मौके पर प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि सेना दिवस हर वर्ष 15 जनवरी को लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा के भारतीय थल सेना के शीर्ष कमांडर का पदभार ग्रहण करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। लेफ्टिनेंट जनरल करियप्पा ने 15 जनवरी 1949 को ब्रिटिश राज के समय के भारतीय सेना के अंतिम अंग्रेज शीर्ष कमांडर जनरल रॉय फ्रांसिस बुचर से यह पदभार ग्रहण किया था। यह दिन सैन्य परेड, सैन्य प्रदर्शनियों एवं अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के साथ सभी सेना मुख्यालयों में मनाया जाता है।
12 एनसीसी हरियाणा बटालियन सोनीपत के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल एसके सूद ने कहा कि केएम करिअप्पा पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें फील्ड मार्शल की उपाधि दी गई थी और साल 1947 में भारत-पाक युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। 1986 में केएम करिअप्पा को बेहतरीन सैन्य सेवाओं के लिए पंच-सितारा रैंक फील्ड मार्शल से सम्मानित किया गया। ये पंच-सितारा रैंक भारतीय सेनाओं में केवल तीन सैन्य अधिकारियों करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स अर्जन सिंह को मिली है।
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एएनओ लेफ्टिनेंट डॉ. बलजिंदर सिंह ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ तब भारतीय सेना के अध्यक्ष ब्रिटिश मूल के ही हुआ करते थे। जब 15 जनवरी 1949 को फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा पहले भारतीय सेना प्रमुख बने, उस समय भारतीय सेना में लगभग 2 लाख सैनिक थे। उसके बाद से ही प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है।
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