अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध नहीं है। गत दिनों हुई चोरी घटनाओं के बाद भी रेलवे स्टेशन और रेलवे यार्ड की सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई। दिखावे के लिए ही स्टेशन परिसर और अन्य जगहों पर चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। स्टेशन पर होने वाली वारदातों के बाद भी पुलिस अनजान बनी हुई है। आए दिन वारदात होने के बाद भी पुलिस शायद किसी अन्य वारदात के होने का इंतजार कर रही है। यही कारण है कि रेलवे का कीमती सामान खुले में पड़ा है, लेकिन सामान की सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
केस-1
चार मार्च को रेलवे स्टेशन पर पैंसेजर ट्रेन में चढ़ते समय एक महिला की दो महिलाओं ने चेन झपट ली थी। इसके बाद महिलाओं ने ही चार दिन बाद आरोपी महिलाओं को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। लेकिन, फिर भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। एसपी रेलवे के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज किया और अगले ही दिन चेन बरामद दिखा दी।
केस-2
करीब 20 दिन पहले कूड़ा बीनने वाली पांच महिलाओं ने रेलवे स्टेशन पर बने पंप घर नंबर सात में से कॉपर के तार चोरी करने की कोशिश की थी। इसके बाद भी न तो रेलवे स्टेशन के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान दिया और न ही रेलवे पुलिस ने उन महिलाओं को पकड़ने की कोशिश। न ही रेलवे स्टेशन पर रखे सामान की चौकसी बढ़ाई। इससे पता लगता है कि रेलवे पुलिस और रेलवे के अधिकारी कितने सजग हैं।
भीख मांगने वाले करते हैं अधिकतर चोरी
रेलवे पानीपत स्टेशन पर भीख मांगने वाले बाबा ही अधिकतर चोरियों में लिप्त मिलते हैं। इसके बाद भी इनके स्टेशन पर आने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है। कुछ दिन पहले आरक्षण को लेकर रेलवे स्टेशन पर स्पेशल फोर्स बुलाई गई। इसकी चेकिंग में सभी बाबाओं को रेलवे स्टेशन के बाहर कर दिया गया था। अगले ही दिन फिर से रेलवे स्टेशन पर वे नजर आने लगे। रेलवे पुल पर कई भीख मांगने वाले बैठे रहते हैं। रेलवे मंत्रालय के अनुसार कोई भी भिखारी रेलवे स्टेशन पर बैठ नहीं सकता।
रेलवे के सामान की सुरक्षा रामभरोसे
रेलवे स्टेशन पानीपत में रेल लाइनों को ठीक करने का अधिकतर सामान रेलवे के पंप घर नंबर सात में रखा हुआ है। यहां सुरक्षा के कोई पुख्ता प्रबंध नहीं है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि सामान रखने वाले कमरे में दरवाजा तक नहीं है। पंप घर के अंदर अधिकतर रेलवे लाइन के तार के बंडल और कॉपर तार के बंडल रखे हुए हैं।
रेल लाइन के निकट रहने वाले करते हैं लूटपाट
रेलवे लाइन के पास असंध रेलवे ओवर ब्रिज, जाटल ओवर ब्रिज के नीचे झोपड़ी और तंबू गाड़कर रहने वाले लोग रात में आने जाने वाले यात्रियों से छेड़छाड़, मारपीट और लूटपाट करते हैं। रेलवे पुलिस का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। रात करीब आठ बजे के बाद रेलवे स्टेशन पर जाने के लिए रेल पटरियों का सहारा लेने वाले यात्रियों से लूटपाट की घटनाएं अधिक होती हैं। अधिकतर लोग पुलिस में लूटपाट की शिकायत दर्ज नहीं कराते। जो करवाते हैं, उन्हें भी परेशान होना पड़ता है।
रेलवे स्टेशन से बाबाओं को हटाने का काम आरपीएफ का है। ठग बाबा रेलवे पुल की सीढ़ियों और परिसर पर खुले आम बैठे हैं। कई बार आरपीएफ को कह चुके है कि इनको बाहर किया जाए। पंप घर नंबर सात का कार्य क्षेत्र रेलवे के भवन निर्माण विभाग के कार्यक्षेत्र में आता है। विभाग के अधिकारियों से बातचीत करके इसका समाधान निकाला जाएगा।
धीरज कपूर, एसएस, रेलवे पानीपत।