अमर उजाला ब्यूरो
समालखा। कुरुक्षेत्र सांसद राजकुमार सैनी ने एक बार फिर जाटों का नाम लिए बिना आरक्षण आंदोलन व सरकारी तंत्र पर सवाल उठाए और उन्होंने एक बार फिर मुख्यमंत्री बनने की इच्छा स्पष्ट कर दी। कहा कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला तो वह प्रदेश में व्यवस्था बदलेंगे।
सांसद राजकुमार सैनी रविवार को एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बात कर रहे थे। इसके बाद वे गांव किवाना में आयोजित एक जनसभा में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वह देश के नागरिक पहले हैं और उसके बाद पार्टी के कार्यकर्ता हैं। कहा कि वर्षभर से प्रदेश में आरक्षण आंदोलन चल रहा है। कुछ वर्ग अपनी शक्तियों का प्रदर्शन करने पर लगे हैं। यदि सड़कों पर फैसले होने लग गए तो अदालतें बेमानी हो जाएंगी। तंज कसा कि जो काम पर नहीं जाते, वही यूनियन बनाते हैं। लाखों का वेतन लेने वाले ही हड़ताल करते हैं। उन्होंने कहा कि ऊपरी सदन राज्यसभा को समाप्त कर देना चाहिए। पत्रकारों से बात करते हुए राजकुमार सैनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी सरकार पर आरक्षण के लिए दबाव बनाया जा रहा है। मांग करने वालों ने पहले लोगों को मारा, फिर घर जलाए और ऐसे लोगों के साथ प्रदेश के मंत्री परिषद का एक टेबल पर बैठकर बात करना उचित नहीं है। कहीं पर भी प्रजातंत्र दिखाई नहीं दिया, इसलिए प्रजातंत्र की रक्षा करने के लिए लोकतंत्र सुरक्षा मंच बनाया है। प्रदेश के भाईचारे में जहर घोलने के प्रश्न पर सांसद ने कहा कि हम तो अमृत पिला रहे हैं और बांट तो दूसरे लोग रहे हैं। संसद का ऊपरी सदन राज्यसभा अंग्रेजों ने अपने लाभ के लिए बनाया था। हारे-नकारे लोगों सहित परिवार, अभिनेता आदि इसमें आते हैं। वे पार्टी विशेष के पक्ष में ही रहते हैं। दावा किया कि विकास के 70 प्रतिशत निर्णय राज्यसभा की भेंट चढ़ जाते हैं। कहा कि एसी कमरों में बैठकर लाखों रुपये की सैलरी लेने वाले अधिकारियों की बजाय दिनभर धूप में काम करने वाले पुलिस वालों का वेतन बढ़ना चाहिए। इस अवसर पर अशोक, हरी, शमशेर कौशिक, राकेश सैनी, सूरजभान सैनी, रितेश आदि मौजूद रहे।